
योल (कांगड़ा)। छावनी बोर्ड और सैन्य प्रशासन की बैठक काफी हंगामेपूर्ण रही। बैठक में छावनी क्षेत्र को पंचायती राज में बदलने के मुद्दे पर माहौल गरमाया। लेकिन सेना द्वारा प्रस्ताव पेश करते ही छावनी बोर्ड के सदस्यों ने बैठक से वाकआउट कर दिया।
छावनी बोर्ड सदस्यों ने सैन्य प्रशासन से मांग उठाई की कि जो पत्र उनके द्वारा हाईकमान को भेजा गया है, उसकी प्रति उपलब्ध करवाई जाए। छावनी बोर्ड सदस्यों ने कहा कि बिना प्रति के प्रस्ताव पारित करने की चाल लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ है। इस अवसर पर बोर्ड सदस्य पूर्ण चंद, विनीता कुमारी, मीना, सतीश, पवन व पूर्व उपाध्यक्ष ओम प्रकाश ने कहा कि सैन्य प्रशासन ने सिविल क्षेत्र को पंचायती राज को सौंपने के लिए कई शर्तें रखी हैं। इनमें गांव टीका वणी में अपनी निजी भूमि पर रह रहे परिवारों को वहां से निकलना, सुरक्षा दीवार के चारों ओर एक किलोमीटर तक निर्माण के लिए सैन्य प्रशासन की मंजूरी लेना, छावनी विद्यालय व चिकित्सालयों को बंद करना हैं। यह सभी शर्तें योल की जनता को स्वीकार्य नहीं हैं। इस मौके पर छावनी बोर्ड के सभी पांच सदस्य, छावनी बोर्ड अध्यक्ष ब्रिगेडियर परमजीत सिंह, एडम कमांडर, छावनी प्रशासनिक अधिकारी एसके माथुर सहित अन्य स्टाफ मौजूद रहा। वहीं छावनी बोर्ड सदस्यों की वॉकआउट करने पर खुशी जताते हुए स्थानीय व्यापार मंडल प्रधान इंद्र सेठी ने कहा कि इन शर्तों पर उन्हें पंचायती राज मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासन कोई भी फैसला लेने से पूर्व सभी वर्गों से राय ले। किसी एक संस्था का निर्णय सभी पर लागू न हो। वहीं प्रशासनिक अधिकारी एसके माथुर ने बैठक में छावनी बोर्ड सदस्यों के वाकआउट की पुष्टि की है।
