भगवान का साक्षात रूप है भागवत कथा

बरमाणा (बिलासपुर)। भगवान की भक्ति के लिए दिखावा नहीं, बल्कि श्रद्धा व आस्था जरूरी है। भक्त ऐसा होना चाहिए कि वह ईश्वर का भजन तो करे लेकिन प्रभु से कुछ मांगे नहीं। भगवान जो भी दे रहे हैं, भक्त को उस पर संतोष होना चाहिए। जिस मनुष्य की लगन प्रभु के चरणों में लग जाती है उसे कुछ मांगने की जरूरत ही नहीं पड़ती। ईश्वर स्वयं उसका ध्यान रखते हैं। यह उद्गार कथा व्यास पंडित शशि शर्मा ने बलोह गांव में आयोजित किए जा रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में प्रवचन करते हुए रविवार को प्रकट किए।
पंडित शशि शर्मा ने कहा कि भागवत कथा भगवान का साक्षात रूप है। इसका श्रवण करने से उतना ही पुण्य मिलता है, जितना गंगा के स्नान से। भागवत कथा सुनने से सत्य का ज्ञान होता है। मानव शरीर प्राप्त करने के बावजूद जो व्यक्ति भगवान को नहीं मानता, उसका जीवन बेकार ही हो जाता है। कलियुग में भागवत कथा ही मनुष्य के मन व विचारों को पवित्र कर सकती है। उन्होंने महिलाओं को अपने सास-ससुर की सेवा अपने माता-पिता की तरह करने की सलाह देते हुए कहा कि इससे बढ़कर उनके लिए और कोई धर्म नहीं है। उन्हाेंने भगवान श्रीकृष्ण की कई लीलाआें का सुंदर ढंग से वर्णन भी किया।

Related posts