फटकर गिरने लगी लीची

डरोह (कांगड़ा)। मौसम की बेरुखी के चलते उपमंडल में लीची की फसल पर संकट गहरा गया है। इलाके के बागवानों और व्यापारियों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। बागवानों का कहना है कि पहले मौसम एकदम शुष्क था, लेकिन अब एकदम से तेज बरसात होने के कारण लीची के फल फटकर गिरने शुरू हो गए हैं।
उपमंडल के सुलह, सलोह, गुग्गा, ठंबा, भाडलदेवी, मनसिंबल, दैहण, बारी, भवारना, सिहोल, बोदा, हैंजा, डरोह, बसकेहड़, कुरल, सिहोटू, गढ़ जमूला, केदारा, बागड़ू, भौरा, पाहड़ा, मनयाड़ा आदि दर्जनों ऐसे गांव हैं, जहां पर लीची और आम बागवानों की नकदी फसल है। इस क्षेत्र में पेड़ों पर फूल लगते समय ही कांगड़ा, नूरपुर, जवाली, नगरोटा, मलां आदि क्षेत्रों के व्यापारी बगीचों को पहले ही एडवांस राशि देकर खरीद लेते हैं। इस बार इलाके में आम की फसल तो नहीं के बराबर है लेकिन लीची की थोड़ी बहुत फसल थी, उस पर अब बरसात ने संकट पैदा कर दिया है। सुलह विस का अधिकतर क्षेत्र लीची उत्पादन के लिए जिले में जाना जाता है। इस क्षेत्र की लीची पंजाब, चंडीगढ़ व दिल्ली की मंडियों को भी सप्लाई की जाती है। मौसम में अगर सुधार नहीं हुआ तो व्यापारी तो लुटेंगे ही, साथ में बागवानों को भी आधी ही कीमत पर गुजारा करना पड़ेगा।
बागवान अजय राणा, अनिल कटोच, मोहिंद्र सिंह, राम कृष्ण, प्यारे लाल, सूंका राम, मदन ठाकुर, दलीप कटोच, मुकेश, बख्शी राम, विनोद, पंकज, उधो दास, ओम प्रकाश, प्यार चंद, कश्मीर सिंह, रत्तो राम आदि ने बताया कि मौसम के बदले मिजाज से उनकी लीची की फसल बर्बाद हो रही है। व्यापारी देश राज, मंगत राम, किशोरी लाल, भीखम चंद, प्रद्युम्न सिंह, सुशील, बनवारी, प्रीतम आदि का कहना है कि बारिश नहीं थमी तो उन्हें काफी नुकसान हो सकता है।

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