
धर्मशाला। कांगड़ा में पकड़ी गई हजारों की जाली करेंसी का राज अब फोरेंसिक लैब में खुलेगा। पुलिस ने नोटों की छपाई में इस्तेमाल की गई स्याही का सैंपल फोरेंसिक प्रयोगशाला भेज दिया है। बताया जा रहा है कि स्याही की गुणवत्ता का खुलासा होने के बाद यह पता लगाया जा सकेगा कि इस तरह की इंक शातिर कहां से मंगवाते थेे।
पुलिस सूत्र बताते हैं कि यह गोरखधंधा कांगड़ा शहर में एक महीने से जारी था। इस दौरान स्थानीय बाजार में शातिर इन नकली नोटों को भुनाते रहे। इस धंधे की आड़ में लोकल मार्केट समेत आसपास के शहरों में भी आरोपियों ने नकली नोट का प्रयोग किया है। दोनों युवक नोट प्रिंट करने वाली मशीन से जाली नोट छापकर गाढ़ी कमाई के चक्कर में थे। मशीन के माध्यम से छापे गए नोट की भनक लगने के बाद पुलिस ने 500 रुपए के 71 नोट भी बरामद किए। कयास लगाए जा रहे हैं कि इन दोनों आरोपियों के किसी बडे़ अंतरराज्यीय सक्रिय गिरोह से भी संबंध हो सकते हैं। हालांकि पुलिस इसका खुलासा अभी तक नहीं कर पाई है। जाली नोट मिलने के बाद कांगड़ा, धर्मशाला समेत आसपास के लोग भी फेक करेंसी को लेकर अलर्ट हो गए हैं। गौर हो कि दोनों आरोपी भी कांगड़ा जिला के रहने वाले हैं। घटना के बाद स्थानीय बाजारों में भी 500 के नोट को लेन-देन के दौरान गहनता से चेक किया जा रहा है। वहीं, अब नोट प्रिंट करने वाली मशीन पुलिस के कब्जे में है। एक माह से जाली नोट छापने का धंधा चलने से लोग काफी हैरान हैं। इन दोनों आरोपियों के पास नकली नोट और नोट प्रिंट करने के साफ्टेवयर की ट्रेनिंग को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोपी विक्रांत की निशानदेही के आधार पर नोट प्रिंट करने वाली एक मशीन सहित अन्य आरोपी अजय निवासी चौदा को हिरासत में लिया था। इससे पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा 500 रुपए के जालीनोट मार्केट में उतारने की चरचाएं चल रही थीं। अब इस धंधे में स्थानीय लोगों के जुड़ने का क्रम भी शुरू हो गया है।
उधर, एएसपी मोहित चावला ने बताया कि इस मामले में छानबीन चल रही है। अभी यह खुलासा नहीं हो सका है कि इन दोनों आरोपियों का संबंध किसी बड़े गिरोह से है या नहीं। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। इस मामले में जल्द ही और खुलासे पुलिस की ओर से किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि स्याही के नमूने जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेज दिए हैं।
