
उत्तरकाशी। गंगोत्री घाटी में दस दिनों से भूखे-प्यासे फंसे यात्रियों पर प्रकृति का इस तरह कहर टूटा कि अब वह पूरी तरह से पस्त हो गए हैं। ऐसे में हर्षिल-भटवाड़ी से हेलीकाप्टर से आ रहे यात्री मनेरी-मातली में न उतरकर पायलट से सीधे देहरादून छोड़ने की गुहार लगा रहे हैं। बुधवार
शाम पांच बजे दिल्ली कालकाजी के यात्रियो का दल मातली हैलीपैड पर उतरा तो दल में शामिल 10 वर्षीय चिराग पायलेट के हाथ-पांव पड़ने लगा और कहने लगा अंकल हमें प्लीज देहरादून छोड़ दो, लेकिन पायलट में यह कहकर उसे उतार दिया कि बेटा दूसरा हेलीकाप्टर आ रहा अभी उतर जाओ। बच्चा कुछ देर तक आसमान में मंडारते हेलीकाप्टर को देखता रहा, लेकिन बाद उन्हें वाहन से ही चिन्यालीसौड़ तक जाना पड़ा। हेलीकाप्टर के पायलेटों से इस तरह की गुहार हर्षिल,भटवाड़ी तथा मनेरी से मातली हैलीपैड़ पर आने वाला हर यात्री लगा रहा है। पहाड़ी पगडंडियों का नाप कर वह इतने थक चुके हैं, कि वह अब दो कदम भी नहीं चल पा रहे हैं। कई यात्रियों के पैदल चलकर पांव सूज गए हैं। अभी गंगोत्री घाटी में सैकड़ों यात्री फंसे हुए हैं।
