दुश्मन को भी ऐसा दिन न दिखाए भगवान

शिमला। शिमला से उत्तराखंड गया बुजुर्ग दंपति सैकड़ों बार मौत को मात देकर सुरक्षित लौट आया है। पर यहां पहुंचने के बाद जो व्यथा इन्होंने सुनाई, वो रौंगटे खड़े कर देती है। इन्होंने कहा कि 100 रुपये में चाय का एक कप और 500 रुपये में परांठा खरीदना पड़ा। दो दिन तक यमनोत्री में फंसे रहे इस दंपति ने 40 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर अपनी जान बचाई। इस दौरान एक किलोमीटर का सफर तय करने के लिए टैक्सी चालक को 1000 रुपये भी दिए।
मिनी कुफ्टाधार निवासी दीप राम शर्मा और देवेंद्रा शर्मा 13 जून को शिमला से उत्तरांचल गए थे। 15 जून को यमनोत्री में आई बाढ़ में दोनों फंस गए। इस दौरान इन्होंने कई लोगों को अपने सामने मरते हुए देखा। एक-दूसरे को धीरज बंधाते हुए दोनों ने 16 और 17 जून को पैदल सयानाचट्टी से ऋषिकेश जाने का फैसला किया। दो दिन के इस पैदल सफर में इन्होंने सैकड़ों बार मौत को मात दी। दीप राम शर्मा बताते हैं कि राहत के नाम पर प्रशासन की ओर से किसी ने भी संपर्क नहीं किया। प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे लोगों को लूटने के लिए कई लोगों ने दुकानें खोल रखी हैं। हर पल मौत से जूझ रहे भूखे प्यासे लोग भी विवश होकर ऊंचे दामों पर खाना खरीदने को मजबूर हैं। देवेंद्रा शर्मा का कहना है कि उन्होंने दो दिन के दौरान करीब 40 किलोमीटर का सफर तय किया। इस दौरान कई टैक्सियों को उन्होंने किराये पर लिया। कुल 18 हजार रुपये उन्होंने टैक्सी के सफर के लिए दिए।

शिमला की बारिश से भी सहम गए दोनों
शिमला में मंगलवार दोपहर और रात को हुई तेज बारिश से दोनों बुजुर्ग बुरी तरह से सहम उठे। पुत्र किशोर शर्मा ने बताया कि उनकी मां के पैरों में बहुत सूजन है। रह-रह कर उन्हें यादें सता रही हैं।

बीते साल पूरी की थी तीन धाम यात्रा
दीप राम शर्मा और देवेंद्रा शर्मा ने बीते साल तीन धाम की यात्रा पूरी की थी। इस साल उत्तरांचल जाकर चार धाम की यात्रा पूरी करनी थी, लेकिन इन्होंने सोचा नहीं था कि इस धाम को पूरा करते समय मौत से भी सामना होगा।

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