मुआवजे के लिए जिंदा मां को मरा बताया

हरिद्वार। जिस लाडले को नौ माह गर्भ में रखा, लाड़-प्यार से बड़ा किया। उस बेटे ने बुढ़ापे का सहारा बनने के बजाए चंद रुपयों की खातिर जीते जी अपनी मां को मार दिया। बेटा हरिद्वार में अज्ञात शव लेने पहुंच गया और पुलिस से अंतिम संस्कार कर प्रमाण पत्र देने का आग्रह किया। लेकिन बेटे की करतूत पकड़ में आ गई। पकड़े जाने के डर से आरोपी फरार हो गया।
सीओ सदर राजेश भट्ट ने बताया कि तीन दिन पहले सती घाट कनखल से एक साठ वर्षीय महिला का शव बरामद हुआ था। शिनाख्त के लिए फोटो आदि देहरादून कंट्रोल रूम भी भेजा गया था। परमजीत सिंह संधू (पुत्र दर्शन सिंह निवासी गार्डन कालोनी, खैरी रोड, डोईवाला) ने महिला की शिनाख्त अपनी मां के तौर पर की और शव लेने हरिद्वार पहुंच गया। परमजीत ने पुलिस को बताया कि उसके पिता और मां केदारनाथ यात्रा पर गए थे। स्वयं वह गुरुद्वारे में कीर्तन करता है। पुलिस ने उसे चार गवाह लाने के लिए कहा, इस पर वह आनाकानी करने लगा। परमजीत शव का अंतिम संस्कार कर प्रमाण पत्र देने की जिद पर अड़ गया। दारोगा उर्मिला बुटोला ने डोईवाला में उसके पते की तस्दीक कराई। किसी तरह उसकी पत्नी का मोबाइल नंबर लेकर उससे बात की। पत्नी ने बताया कि उसके ससुर की मौत दो साल पहले हो चुकी है। जबकि सास जिंदा है। परमजीत ने जो नंबर दिया था वह भी गलत निकला। उसके दूसरे नौ भाई-बहनों के बारे में पता किया तो उनके बारे में भी वह जानकारी देने से इनकार करता रहा और इसी बीच फरार हो गया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

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