
हरिद्वार। आपदा के चलते प्रदेश में चारधाम यात्रा पर रोक लगने से इस बार कोई भी कांवड़िया जल लेने गंगोत्री, गोमुख और उत्तरकाशी नहीं जा पाएगा। पहाड़ों के हालात को देखते हुए कांवड़ियों का नीलकंठ जाना भी मुश्किल लग रहा है। अत: 23 जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा का पूरा भार हरिद्वार को उठाना पड़ेगा।
श्रावण मास की कांवड़ यात्रा के दौरान पिछले कुछ वर्षों से गंगोत्री, गोमुख और उत्तरकाशी से जल लाने का प्रचलन बढ़ गया है। हालांकि 90 प्रतिशत कांवड़िए हरकी पैड़ी से ही जल भरते हैं लेकिन कुछ भक्त इसके लिए गंगोत्री और यमुनोत्री भी जाते हैं। लेकिन इस बार भीषण आपदा के चलते यात्रा पर प्रतिबंध लग गया है, अत: तमाम कांवड़िए हरिद्वार से ही जल भरेंगे। देश के विभिन्न शिवालयों में पांच अगस्त को चढ़ाया जाएगा।
कांवड़ यात्री सोमवार के दिन दर्शन करने के लिए नीलकंठ भी जाते हैं। फलस्वरूप रविवार और सोमवार के दिन ऋषिकेश, स्वर्गाश्रम, लक्ष्मणझूला आदि में भी इनकी भीड़ रहती है। ऋषिकेश के वीरभद्र में भी कांवड़िए दर्शनार्थ जाते हैं। पहाड़ों के हालात को देखते हुए हरिद्वार मे उम्मीद जताई जा रही है कि नीलकंठ जाने वालों की संख्या भी कम रहेगी। कांवड़ियों की पूरी भीड़ हरिद्वार में जुटेगी
