मंडी बनाएगी कूड़ा करकट से जैविक खाद

हल्द्वानी। बस कुछ समय और इंतजार कीजिए! मंडी समिति में कहीं भी कूड़ा करकट ढूंढे नहीं मिलेगा। मंडी से प्रतिदिन निकलने वाले कूड़ा करकट से जैविक खाद बनाई जाएगी। इसके लिए गौला बाईपास पर प्लांट बनाने का काम चल रहा है। जैविक खाद बनाने वाले इस प्लांट पर करीब सवा दो करोड़ रुपये लागत आएगी।
मालूम हो कि कुमाऊं की सबसे बड़ी मंडी समिति में नैनीताल जिले के अलावा अल्मोड़ा और बागेश्वर क्षेत्र के किसान अपनी उपज लेकर आते हैं। इसके अतिरिक्त मैदानी क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में किसान यहां सब्जी लेकर पहुंचते हैं। मंडी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में कृषि उपज आने की वजह से कूड़ा करकट फैलने से सफाई की समस्या बनी रहती है। इस समस्या को दूर करने के मकसद से मंडी समिति ने सब्जियों के कूड़ा करकट से जैविक खाद तैयार करने का प्रस्ताव तैयार किया। इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद केंद्र सरकार से दो करोड़ 20 लाख की राशि भी आवंटित हो चुकी है। गौला बाईपास पर झील विकास प्राधिकरण के रिसाइकिलिंग प्लांट के निकट भूमि पर मंडी के जैविक खाद बनाने वाले प्लांट का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके बाद मंडी से प्रतिदिन निकलने वाला कूड़ा करकट इसी प्लांट पर भेजा जाएगा जिससे जैविक खाद बनाया जाएगा। बता दें कि अभी मंडी में सफाई कार्य ठेके पर होने के बावजूद इधर – उधर कूड़ा करकट पड़ा रहने से गंदगी की समस्या बनी रहती है। वर्तमान में मंडी से प्रतिदिन करीब पांच – छह डंपर कूड़ा निकल रहा है जिसे गौला बाईपास पर डंप किया जाता है।

वन विभाग से लीज पर ली है ढाई एकड़ भूमि : सचिव
हल्द्वानी। मंडी सचिव विनोद कुमार लोहुमी बताते हैं कि कूड़े से जैविक खाद बनाने के लिए प्लांट लगाने को वन विभाग से गौला बाईपास पर करीब ढाई एकड़ जमीन लीज पर ली गई है। इस जमीन का मंडी को किराए के रूप में सालाना दो लाख 24 हजार रुपये देने होंगे। इस प्लांट का निर्माण मंडी समिति की निर्माण इकाई कर रही है।

एप्रोच रोड और पानी की आ रही समस्या: डीडीसी
हल्द्वानी। मंडी परिषद के उपनिदेशक (निर्माण) रामानुज गुप्ता ने बताया कि जैविक खाद प्लांट के शेड का निर्माण पूरा हो चुका है। उपकरण भी जल्द लग जाएंगे। फिलहाल प्लांट तक वाहनों के आवागमन के लिए एप्रोच रोड की समस्या आ रही है। इस बारे में वन विभाग से बात चल रही है। इसके अलावा प्लांट संचालित करने के लिए पानी की समस्या भी सामने आ रही है। पानी की व्यवस्था के संबंध में रिसाइकिलिंग प्लांट के संचालक झील विकास प्राधिकरण से सहयोग मांगा गया है।

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