
गौचर। मंगलवार को भी सेना और वायु सेना के जवानों ने केदारघाटी और बदरीनाथ में फंसे यात्रियों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखा। गौरीकुंड से जंगलों और पगडंडियों से किसी तरह पैदल चलकर गौचर पहुंचे कुछ लोगों ने बताया कि अभी भी भैरवचट्टी के पास कुछ लोग फंसे हैं। बताया कि गौरीकुंड घोड़ा पड़ाव के सामने पचास से साठ खच्चर जिंदा हैं।
मींग गदेरा नारायणबगड़ निवासी हरीश ने बताया कि गौरीकुंड घोड़ा पड़ाव के सामने नदी पार पचास से साठ खच्चर फंसे हैं। गैरसैंण के अर्जुन ने बताया कि वह गौरीकुंड में एक होटल में नौकरी करता था। आपदा से जान बचाकर वह भी जंगलों के रास्ते नौ दिन बाद गौचर पहुंच सका है। दोनों युवकों ने बताया कि सिर्फ गौरीकुंड से केदारनाथ के साथ ही सोनप्रयाग, फाटा और गुप्तकाशी के चारों ओर स्थित गांवों में आपदा से भारी नुकसान हुआ है। इस दौरान गौरीकुंड से आए साधुओं ने भी बताया कि केदारघाटी में आपदा से स्थानीय गांवों के भी कई लोग लापता है।
