गगास उफनाई तो बह जाएंगे उकला, मजगांव, कोटली

रानीखेत। इस बार यदि गगास नदी उफनाई तो सिलोर घाटी में नदी किनारे बसे उकला, मजगांव और कोटली गांवों को बहने से कोई नहीं रोक सकता। ग्रामीण नदी से सिर्फ 15 फीट की दूरी पर हैं और बारिश होने की संभावना के चलते ग्रामीण सहमे हुए हैं। कृषि बाहुल्य इस क्षेत्र में गत आपदा में सिंचाई नहर क्षतिग्रस्त हो गई थी, शासन प्रशासन के नुमाइंदों ने गांवों का निरीक्षण कर गगास नदी का रुख मोड़ने, तटबंध बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक इन पर अमल तक नहीं हुआ।
गत वर्षों में हुई अतिवृष्टि के दौरान गगास नदी ने अचानक रुख बदल लिया, जिस कारण उकला, मजगांव, कोटली गांवों के लगभग 60 परिवारों को खतरा पैदा हो गया। गत आपदाओं के दौरान उकला में भारी भू कटाव हुआ, लोगों के गौशाले बह गए, कृषि योग्य भूमि कट गई। सिंचाई नहर आपदा लील गई थी, लेकिन नहर का पुनर्निर्माण आज तक नहीं हुआ। सिलोर घाटी संघर्ष समिति की अध्यक्ष कमला बिष्ट ने कहा कि आपदा के दौरान जनप्रतिनिधि और सरकारी नुमाइंदों ने मौका मुआयना किया और गगास नदी का रुख मोड़कर यहां तटबंध बनाने के आश्वासन दिए थे, लेकिन ग्रामीण छले गए हैं। अब फिर से आपदा का दौर शुरू हो चला है। हालांकि गगास नदी ने अभी तक रौद्र रूप नहीं दिखाया है। उकला गांव निवासी नंदन सिंह का कहना है कि आपदा के दौरान उनकी दुकान बह गई। लेकिन मुआवजा आज तक नहीं मिल सका। लोकपाल सिंह बिष्ट ने बताया कि उनकी गौशाला, चार नाली जमीन, तुन का पेड़, बह गए थे। नहर बहने से खेती किसानी से लोग विमुख होने लगे हैं। आश्वासनों पर कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीण महिलाओं में भारी आक्रोश है। ज्येष्ठ उपप्रमुख चंद्रशेखर ने बताया कि ग्रामीणों को इस आपदा के भय से मुक्ति दिलानी होगी। पूर्व बीडीसी सदस्य गोपाल सिंह, विजय नेगी, उमराव सिंह, कमल सिंह, लाल सिंह, हरीश चंद्र, नरी राम आदि ने कहा कि यदि शीघ्र तटबंध नहीं बने तो आंदोलन होगा।

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