
कोटद्वार। अगर लोगों को शुद्घ पानी उपलब्ध कराने का दावा करने वाले जलसंस्थान वास्तव में लोगों के स्वास्थ्य और अपनी जिम्मेदारियों के प्रति कितना सजग और सतर्क है इसकी बानगी कालाबड़ में देखने को मिल सकती है। यहां स्थित पानी की टंकी की सफाई पांच उसाल से नहीं कराई गई। यह हम नहीं कह रहे बल्कि कालाबड़ में लगा वाटर सर्प्लाई टैंक खुद बता रहा है। टैंक की दीवार पर सफाई की तारीख तीन अप्रैल 2008 दर्ज है। सिर्फ कालाबड़ टैंक ही नहीं नगर के अन्य टैंकों की स्थिति भी यही है।
बर्बाद हो रही फिल्टरिंग मीडिया
कोटद्वार। टैंकों में खास रेत की मदद से पानी को फिल्टर किया जाता है। यह रेत झांसी से मंगाई जाती है। इस रेत को फिल्टरिंग मीडिया कहा जाता है। लेकिन, यहां लाखों रुपये की कीमत से मंगाई गई फिल्टरिंग मीडिया खुले में बर्बाद होने के लिए छोड़ दी गई है।
टंकियों की स्थिति
ओवरहेड टैंक-04
रो टैंक-02
अंडरग्राउंड टैंक-02
हो सकती हैं ये बीमारियां
गंदा पानी पीने से टायफाइड, डायरिया, लिवर और पाचन से जुड़ी बीमारियां, किडनी में पथरी की दिक्कत भी हो सकती है। त्वचा संबंधी रोग भी गंदे पानी से होते हैं। इससे बचाव के लिए पानी को हमेशा उबालकर ही पीना चाहिए। बरसात के मौसम में तो इसे दिनचर्या में अनिवार्य तौर पर शामिल कर लेना चाहिए।
(जैसा राजकीय अस्पताल के सीएमएस डा. आईएस सामंत ने बताया)
टंकियों में सफाई नियमित रूप से की जाती है, लेकिन कई बार किसी वजह से उन पर तारीखें नहीं लिख पाते हैं। क्लोरीनेशन वगैरह समय-समय पर किया जाता है। सैंड खुले में रखे जाने के बाबत मुझे जानकारी नहीं है।
-सतीश चंद्र नौटियाल, एई, जल संस्थान
