लाशों पर चलकर पार की पहाड़ी

चौखुटिया। रमेश तिवारी उन भाग्यशाली लोगों में हैं जो केदारघाटी में मौत को मात देकर लौटे हैं। साठ किमी पैदल चलकर आए तिवारी ने दो रातें जंगल में बिताईं। उन्होंने एक पहाड़ी लाशों पर चलकर पार की। बताया कि हजारों शवों की दुर्गंध में समय बिताना मुश्किल था।
जिंदगी और मौत के बीच झूलते लौटे द्वाराहाट के मनेला निवासी रमेश तिवारी ने एक मित्र के साथ पहली बार 15 मई से गौरीकुंड के घोड़ापड़ाव में होटल शुरू किया था। बारिश से पहाड़ियां 15 जून से ही दरकने लगी थीं। 16 जून को स्थिति बिगड़ी, वे होटल छोड़कर ऊपर को भागे। रात अस्पताल में रहे, अगली सुबह हजारों लोगों के साथ जंगल भागे, दो रातें वहीं बिताईं। 18 जून को निकट गांव में रहे। उस गांव के सभी 14 परिवारों ने खतरे और शवों की दुर्गंध के चलते गांव छोड़ दिया है।
19 जून को वे नदी में पेड़ डालकर बनाए पुल से सोनप्रयाग, फाटा और गुप्तकाशी तक 60 किलोमीटर पैदल चले। वहां से मुफ्त बस से देवप्रयाग और फिर चौखुटिया पहुंचे। एक जगह गांव वालों ने मुफ्त खाना खिलाया।

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