
शिमला। हिमाचल प्रदेश डीपीईज संघ की जिला शिमला इकाई ने पीजी करने पर रोक लगाने के फैसले पर आपत्ति जताई है। संघ के जिला अध्यक्ष सतीश चौहान, महासचिव नरेंद्र कंवर, वरिष्ठ उप प्रधान जीवन नेगी, कोषाध्यक्ष संतोष चौहान सहित प्रेस सचिव संजय नेगी ने कहा कि डीपीईज अर्न लीव लेकर शारीरिक शिक्षा में मास्टर डिग्री कर रहे हैं, लेकिन विभाग ने पत्राचार से उनकी आगे की पढ़ाई पर रोक लगा दी है। प्रदेश भर में 400 से अधिक डीपी इसी तरह से पीजी कर रहे हैं। संघ चार साल से सरकार से वन टाइम बेनिफिट देकर प्रवक्ता शारीरिक शिक्षा का पद्नाम और वेतनमान मांग रहे हैं। डीपी जमा दो के छात्रों को पढ़ाकर उस कार्य को पहले ही कर रहे हैं, जिसके पद्नाम की वे मांग कर रहे हैं। इन शिक्षक नेताओं ने कहा कि प्रवक्ता होने के लिए पीजी होना जरूरी है। बावजूद इसके न तो शिक्षकों को पीजी करने को बाहर भेजा जा रहा है और न ही उन्हें पीजी करने दी जा रही है। इसलिए शिक्षा विभाग पीजी पर रोक लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करे। संघ पदाधिकारियों ने डीपीईज को बढ़ा हुआ ग्रेड पे देने, प्रवक्ता का पद्नाम और वेतनमान देने की मांग उठाई। उन्होंने विभाग से पत्राचार से पीजी करने देने के साथ ही अन्य मांगों को पूरा करने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि साइंस और अन्य विषयों में ऐसे कई शिक्षक हैं, जिन्होंने पीजी करने के बाद प्रवक्ता पद भी प्राप्त किए हैं, तो डीपीईज को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है।
