
मंडी। मंडी संसदीय उपचुनाव के लिए रविवार को मतदान का दिन। तड़के हुई बारिश से मौसम खुशगवार। फिर भी मतदाता वोटिंग के लिए घरों से बाहर नहीं निकले। उपचुनाव के मैदान को जीतने के लिए सियासी दलों को वोटिंग अधिक होने उम्मीद थी। हर विधानसभा हलके से लीड मिलने का समीकरण बनाया था। लेकिन, मतदाताओं ने वोटिंग में दिलचस्पी न दिखा कर सियासी दलों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
प्रमुख राजनीति दल कांग्रेस और भाजपा के लिए उपचुनाव जीतना प्रतिष्ठा का सवाल बना है। 21 दिनों तक सियासी दलों ने मतदाताओं का समर्थन जुटाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। जिसके बावजूद मतदाताओं की ओर से वोटिंग के प्रति दिलचस्पी न दिखाना, सियासी दलों के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। रविवार तड़के हुए बारिश से एक बार ऐसा लग रहा था कि मतदान प्रभावित होगा। मगर मतदान शुरू होने से पहले ही बारिश थम गई और मौसम खुशगवार हो गया। पूरे दिन मौसम साफ रहा। मगर अधिकतर मतदाताओं ने उपचुनाव में अपने वोट की कीमत नहीं समझी। हर पोलिंग बूथों के बाहर इस बात की चर्चा होती रही कि मतदान के प्रति लोगों में इस बार दिलचस्पी नहीं है। इसका कारण जानना चाहा तो जवाब मिलता है कि अगले साल फिर से लोकसभा के आम चुनाव होने हैं। पोलिंग बूथों के बाहर भी सियासी दलों के कार्यकर्ताओं में कोई खासा उत्साह नहीं दिखा। मंडी संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत 16 विधानसभाओं से पल-पल यही सूचना मिलती रही कि मतदान के प्रति लोगों में उत्साह नहीं है। बुजुर्ग लोग मतदान केंद्रों तक पहुंचे। मगर युवा मतदाताओं में मताधिकार के प्रति ज्यादा उत्साह नहीं था। कम मतदान से सियासी दलों के समीकरण भी बिगड़ गए। वहीं पार्टी नेताओं को भी परफोरमेंस के रूप में अपने हलके से लीड दिलाने की चिंता बढ़ गई है।
