
चंबा (टिहरी)। रामबाड़ा में मची तबाही में परिवार के 9 सदस्यों को खोकर अकेली मौत से बचकर आई शशि देवी अभी उस दर्दनाक हादसे उभर नहीं पाई है। अपनी नम आंखों से आपदा का खौफनाक मंजर की दास्तां सुनाते हुए बताया कि परिवार के 10 सदस्य केदार बाबा के दर्शन करने के बाद रामबाड़ा में रुके हुए थे। लगातार बारिश होने पर एक होटल में जगह मिली। तभी एक जोर का धमाका हुआ, सभी होटल के बाहर आए तो नदी में लोग और मकान बहते दिखे। इसी बीच मेरे परिवार के नौ सदस्य भी मेरी आंखों के सामने ही जल प्रलय में समां गए।
मौत के मुंह से बचकर आई चोपड़ियालगांव की शशि ने बताया कि परिवार के 10 सदस्यों के साथ ही सिलोगी के 4 और कैंछू गांव के 2 लोग 16 जुलाई को केदारनाथ के दर्शन के बाद रामबाड़ा पहुंचे। तभी भारी बारिश शुरू हो गई। होटल में आराम कर ही रहे थे कि भागो-भागो चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। घटना को बताते हुए शशि देवी फफकर रो पड़ी। बताया कि पानी आने से सबसे पहले परिवार के बच्चे और महिलाएं बह गई। जिन्हें बचाने के चक्कर में परिवार के अन्य सदस्य भी विकराल धारा में बह गए। इसी बाड़ में सिलोगी के चार लोग भी बह गए। मैं भी कुछ दूर तक मलबे के साथ बह गई, लेकिन किस्मत ने बचा लिया। दो दिन तक दलदल में भूखा और प्यासा रहना पड़ा। हादसे के दूसरे रोज हेलीकाप्टर से मदद पहुंची, मगर खाने के कई पैकेट गिरने के बाद भी हाथ खाली ही रहे। इस बीच कई लोगों ने भूख -प्यास के मारे दम तोड़ दिया। 18 तारीख की शाम को हेलीकाप्टर ने लावारिश हालत में फाटा छोड़ा तो जान बच गई। शशि देवी इस मंजर के बाद सदमें में है।
परिवार के सदस्य जो लापता हैं-
भगवती प्रसाद डबराल (65) उनकी पत्नी शाकांबरी देवी (55), सुरेंद्र डबराल (42) उनकी पत्नी कविता डबराल (35)व बच्चे सोनू (12), मोनू (10) और श्यामलाल डबराल (38) उनके बच्चे स्वाती व नितिन। सिलोगी के जगदीश प्रसाद भट्ट (65) उनकी पत्नी रुकमणी देवी (60), हरिनंद भट्ट (45) उनकी पत्नी प्रभा देवी (40) भी लापता हैं।
नहीं लग पा रहा पता
लंबगांव (टिहरी)। केदारनाथ क्षेत्र में ठेकेदारी करने वाले भदूरा के सौड़ गांव निवासी पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य कैलाश व्यास का कहीं सुराग नहीं लग पा रहा है। उनके साथ काम करने वालेआरगढ पट्टी के घैरका गांव निवासी अषाड़ सिंह चौहान का भी कोई पता नहीं चला है। 15 जून को कैलाश व्यास की अपने परिजनों से अंतिम बार टेलीफोन पर वार्ता हुई थी। आपदा आने की सूचना पर परिजन उन्हें ढूढ़ने निकले, मगर पूरे क्षेत्र में तलाशी लेने के बाद जब कही कोई पता नहीं चला तो खाली हाथ बैरंग लौट आए है।
अपनों की तलाश में भटक
रहे दिल्ली के परिवार
नई टिहरी। आपदाग्रस्त क्षेत्र में फंसे अपनों की तलाश में लोग दर-दर भटक रहे हैं। नई दिल्ली देवली खानपुर गांव का 30 सदस्यीय दल केदारनाथ की यात्रा पर गया हुआ था। आपदा आने के बाद किसी का कोई पता नहीं चल पा रहा है। अपनों को तलाशते हुए परिजन नई टिहरी पहुंच कर लोगों से मदद की गुहार लगा रहे है। देवली खानपुर गांव निवासी बाल किशन उर्फ बिल्लु अपने परिजनों की तलाश में नई टिहरी पहुंच गया। उसने बताया कि गांव के 30 लोग केदारनाथ दर्शन के लिए आए हुए थे। जिसमें उनकी माता जगवती देवी, भाई मनोज कुमार, बहू ममता शर्मा, भाई खुशीराम, भाभी ज्ञानवती, बुआ भगवती यादव शामिल थे। उसके मुताबिक 15 जून की शाम परिजनों से आखिरी बार फोन पर बात हुई। उसके बाद कोई बात नहीं हो पाई। लापता परिजनों की तलाश में बाल किशन और सुशील शर्मा गायब परिजनों की फोटो एक गत्ते पर चस्पा कर लोगों से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
बचे तो माना ईश्वर का शुक्र
नई टिहरी। राजस्थान के गणेशगढ़ गांव गंगानगर से केदारनाथ की यात्रा पर गया नौ सदस्यीय दल सकुशल बच निकल आया है। आपदा के खौफनाक त्रासदी से बचकर निकले लोग ईश्वर का शुक्र मानते हैं कि उन्हें खरोच तक नहीं आई। गंगोत्री व यमुनोत्री की यात्रा कर राजस्थान गणेशगढ़ गांव का नौ सदस्यीय दल 16 जून की सुबह 10 बजे गौरीकुंड पहुंचा। वे केदारनाथ जाना चाहते थे। स्थानीय पुलिस ने यात्रा बंद कर दी और उन्हें आगे जाने से रोक लिया। यात्री वेद प्रकाश, जगदीश, कांशीराम, रूकमात, अनिल, विनोद, रिंकू, सुरेंद्र व भजन लाल ने बताया कि बारिश तेज थी तो वे बहल आश्रम में रात्रि विश्राम को रूक गए। तेज आवाज सुनाई देने पर बाहर निकले तो चारों तरफ नदी-नाले उफान पर थे। बताया कि इसी बची उनका होटल भी होटल टूट कर गिरने लगा। इसके बाद वह भागते हुए ऊंचे स्थान पर चले गए।
