मंदिर के भीतर अब भी 50 से अधिक शव

गोपेश्वर। केदारनाथ धाम में 17 जून को मंदिर के मंडप में जिंदगी की जंग लड़ रहे तीर्थयात्रियों के लिए केदारनाथ मंदिर के मंडप में मां लक्ष्मी की प्रतिमा के पीछे अचानक खिड़कीनुमा खुला। जिससे करीब 50 लोगों की जानें बची।
उस खौफनाक मंजर में मंदिर के गर्भगृह से जैसे-तैसे जान बचाकर बाहर आए नेयति चेरिटेबल ट्रस्ट के कर्मचारी आशीष उनियाल शुक्रवार को अपने घर छिनका पहुंचे। उन्होंने अमर उजाला को बताया कि तबाही के दिन जब मंदिर के अंदर मलबा और पानी भरने पर लोगों की चीख, पुकार शुरू हुई मंदिर के मंडप में मां लक्ष्मी की प्रतिमा के पीछे स्थित खिड़कीनुमा दरवाजा ऐसे खुला जैसे किसी ने हथियार से दरवाजे पर जोरदार प्रहार किया हो। यहां से करीब 50 लोग जान बचाकर बाहर निकले। उनियाल के अनुसार केदारनाथ मंदिर के भीतर अब भी 50 से अधिक लाशें मलबे में दबी हैं। उन्होंने कहा कि 16 जून की रात 7.45 बजे जब केदारनाथ भगवान की आरती हो रही थी, तो उस वक्त भी मूसलाधार बारिश और आसमानी बिजली कड़क रही थी। आरती संपन्न होने के बाद मंदिर के पीछे जोरदार बिजली कड़की, और पानी का सैलाब देखते ही देखते मंदिर के पीछे से बहने लगा। मंदिर के पीछे स्थित अन्न क्षेत्र (जहां भोग बनता है) के भवन ध्वस्त होकर नीचे आने लगे। तभी अफरा तफरी मच गई। लेकिन थोड़ी देर में बारिश कम हुई और तबाही रुक गई। तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। लेकिन बारिश बंद नहीं हुई। लोग रातभर सो नहीं पाए। 17 की सुबह करीब साढे़ आठ बजे मंदिर के पीछे गांधी सरोवर से आए मलबे में सब कुछ तबाह हो गया। उन्होंने बताया कि कई लोग केदार बाबा के लिंग के इर्द-गिर्द मलबे के अंदर दबे हुए हैं।

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