अपनों के गले लग छलक आई आंखें

मंडी। चार धाम की यात्रा पर गया मंडी शहर का 28 लोगों का ग्रुप शनिवार सुबह सुरक्षित लौट आया है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के केदारनाथ में हुई तबाही का मंजर उनकी आंखों में साफ झलक रहा था। अपनों के सुरक्षित घर आने की खुशी में परिजन मंडी के पास एनएच किनारे बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। बस से उतरते ही अपनों से मिल कर परिजनों की आंखें छलक पड़ीं। केदारनाथ धाम में मची तबाही से किसी तरह बच कर मंडी शहर का एक ग्रुप शुक्रवार सुबह साढ़े दस बजे सुरक्षित लौटा आया है। दल में शामिल 28 लोगों के आंखों में तबाही का भयावह मंजर साफ दिख रहा था। इस ग्रुप के प्रबंधक मंडी निवासी राकेश कपूर का कहना है कि ग्रुप में सभी 28 सदस्य मंडी के थे। आठ जून को चार धाम की यात्रा के लिए यहां से निकले। गंगोत्री, यमुनोत्री के दर्शन करने के बाद दल केदारनाथ के दर्शन के लिए रवाना हुआ। 15 जून को रामपुर पहुंचा। सीतापुर और रामपुर के बीच लंबा जाम लगा हुआ था। जिससे वह रामपुर में ही एक होटल में रुक गए। अगले दिन 16 जून को गौरीकुंड पहुंचे। भारी बारिश लगी हुई थी। घोड़े वालों ने आगे जाने से इनकार किया कि बारिश के कारण पहाड़ी से पत्थर गिर रहे हैं। जिससे पूरा ग्रुप वापस पीछे आया। गौरी कुंड और सोनप्रयाग में हुई तबाही को बयां करते हुए माधव राम ठाकुर और उनकी पत्नी हेमा ठाकुर, संतोष शर्मा का कहना है कि सोनप्रयाग में पार्किंग में दर्जनों वाहन फंसे रहे। चार दिन तक सभी लोग रामपुर में फंसे रहे। नेटवर्क पूरी तरह से ठप होने के कारण घर पर बात नहीं हुई। परिजनों की नींद हराम रही। माधव राम की बेटी मीनाक्षी और अन्य परिजन हेमंत, कमल, मनेंद्र का कहना है कि कोई संपर्क न होने से टीवी देख कर रोते रहे। 20 जून को गुप्तकाशी से फोन आया। माधव राम बस इतना ही कहते हैं, हम ठीक हैं। इतनी देर में फोन कट जाता है। इस दल में बृजभूषण गोयल, सरोज गोयल, हेमंत वैद्य, जया वैद्य, ब्रह्मी देवी, टेक चंद, कृष्णा कपूर, मुरारी लाल शर्मा, लता शर्मा, दुनी चंद, भावना, कृष्ण कुमार, मीना गोयल, पवन कुमार, नरेश वैद्य, लुदरमणि, मंघरी देवी, विद्या राम, ठाकुर प्रसाद, राकेश, लेखू, सुरेश, चालक पैनू राम शामिल रहे।

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