आपदाग्रस्त इलाकों में पहुंचा भाकपा

हल्द्वानी। उत्तराखंड में आई आपदा से हर कोई आहत है। प्रशासन से भी लोगों को पूरी मदद और जानकारी नहीं मिल रही है। आपदाग्रस्त इलाकों से आ रही सूचनाओं असंतुष्ट भाकपा (माले) के अतुल सती, आईसा के महादीप पंवार और इंद्रेश मैखुरी खुद जोशीमठ पहुंच गए हैं। वहां उन्होंने जो देखा वह हम आपके सामने रख रहे हैं।
जोशीमठ गोविंदघाट से करीब 25 किमी दूर है। इस बीच जगह-जगह सड़क का बड़ा हिस्सा बह चुका है। अब लोग पहाड़ी पर चढ़कर ही इधर-उधर जा पा रहे हैं। स्थानीय लोगों के लिए तो यह उतना मुसीबत भरा नहीं है लेकिन बाहर से आए तीर्थयात्री मुश्किल में हैं और डरावने अनुभव से गुजर रहे हैं। इंद्रेश ने बताया कि गोविंदघाट का मंजर बेहद भयानक था। जिस जगह बाजार था वहां अलकनंदा बह रही है। मुख्य बाजार में बोल्डर और मातमी सन्नाटा पसरा है। जहां कभी आबादी हुआ करती थी वहां रेत के पांच-पांच फीट ऊंचे टीले बन गए हैं। रेत के नीचे लोग खाने के लिए सामान खोज रहे हैं।
डीबीएस कालेज देहरादून के जिओलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. प्रदीप भट्ट तबाही की रात का सिहरा देने वाला वाक्या सुनाते हैं। रात में दो-तीन बजे के आसपास नदी में तेज गड़गड़ाहट सुन वह होटल से बाहर आए। सड़क पर पहुंचने के बाद याद आई कि कार पार्किंग में खड़ी है। इसके बाद वह कार लेने दौड़े और जैसे ही कार लेकर ऊपर पहुंच पीछे की सड़क धंस गई। देखते ही देखते यहां खड़े होटल और पार्किंग में खड़ी सैकड़ों मोटर साइकिलें अलकनंदा में समा गईं।

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