औरों को नसीहत खुद मियां फजीहत

शिलाई (सिरमौर)। क्षेत्र में विभिन्न दूरसंचार कंपनियों की ओर से लगाए गए मोबाइल टावरों की घातक किरणों से क्षेत्र के लोग महफूज नहीं हैं। निजी कंपनियों की ओर से अपने नेटवर्क का सिग्नल चलाने को शिलाई क्षेत्र में 200 मीटर के हवाई दायरे में लगभग दो दर्जन मोबाइल टावर चालू कर दिए हैं। इनके चालू होने से क्षेत्रवासियों की जेब में मोबाइल की घंटियां तो खूब बज रही हैं, लेकिन उन्हें यह मालूम नहीं कि इन टावरों से निकलने वाली तरंगें मानव शरीर के लिए कितनी घातक हैं। यह तरंगें मानव शरीर के अंदर घातक रोगों को पनपने में बढ़ावा दे रही हैं।
शिलाई क्षेत्र में तिलौरधार, कफोटा, टटियाणा, टिक्कर, बांदली, शिलाई, बाली, पश्मी, गंगटोली और मटियाना में दो दर्जन से ज्यादा टावर चालू हैं। इन टावरों से कितना रेडिएशन फैलता है, इस और किसी का ध्यान नहीं है।
जिला सिरमौर के वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ संजीव सहगल का कहना है कि घातक किरणों के रेडिएशन से आंख ही नहीं बल्कि दिमाग और दिल सहित पूरे शरीर पर इसका कुप्रभाव पड़ता है। जीव विज्ञान के प्रवक्ता संजीव अत्री का कहना है कि इस टावरों से निकलने वाली किरणों से पक्षियों पर भी असर पड़ रहा है। यदि इसको रोकने का कोई प्रावधान नहीं किया गया तो इसके परिणाम घातक होंगे। इस संदर्भ में भारत संचार निगम उपमंडल पांवटा के सहायक अभियंता यशपाल का कहना है कि रेडिएशन को रोकना जरूरी है। इसकी एक सीमा होती है। यदि उस सीमा से ज्यादा रेडिएशन हो तो नुकसान पहुंचता है। इनके मापदंडों का जायजा पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड द्वारा लिया जाता है।

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