
स्वारघाट (बिलासपुर)। हिमाचल प्रदेश वन विकास निगम के हिमकाष्ठ विक्रय भंडार के मंडलीय कार्यालय में दो वर्षों से ताला लटका हुआ है। यहां न तो कभी मंडलीय प्रबंधक बैठे और न ही अन्य स्टाफ परिणाम स्वरूप लाखों रुपए की लागत बना भवन देखरेख के अभाव में खंडहर बनता जा रहा है। हैरत है कि वन विभाग के अधिकारी इसे निगम का मंडलीय कार्यालय मानने को तक तैयार नहीं। दिन में यहां ताला जड़ा रहता है, लेकिन रात को चौकीदार पहरा देने पहुंच जाते हैं।
वन विकास निगम का उक्त मंडलीय कार्यालय पूर्व में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पूर्ण रुप से तैयार हो चुका था। जैसे ही सरकार बदली वैसे ही भाजपा सरकार ने इस कार्यालय के लोकार्पण की रस्म भी अदा कर दी। लेकिन, उसके बाद किसी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस विक्रय भंडार से हर माह बाहरी जिलों से भारी मात्रा में लकड़ी की आमद होती है। हर माह निगम को लकड़ी की नीलामी से लाखों रुपये की आय प्राप्त होती है। इसके बावजूद आज दिन तक किसी बड़े अधिकारी की तैनाती तो दूर की बात है। यहां पर छोटे तबके के कर्मचारी भी निगम पूरे नहीं कर पाया। यहां पर पांच सालों से मंडलीय प्रबंधक की तैनाती नहीं हुई। इनके अधीनस्थ अधिकारी उपमडलीय प्रबन्धक का पद भी दो सालों से रिक्त चल रहा है। अन्य कर्मचारियों में कार्यालय प्रबंधक, स्टेनो, पियून, सहायक प्रबंधक का एक पद, डिप्टी रेंजर के चार पद, वन रक्षकों के तीन पद रिक्त पड़े है। इसके अलावा चौकीदारों के चार पद भी खाली पडे़ है। हैरत यह है कि दिन को तो इस कार्यालय भवन में ताला लगा रहता है, लेकिन रात को यहां चौकीदर पहरा देते हैं। सूत्र बताते हैं कि कार्यालय में लगे टेलीफोन का बिल भी निरंतर भरा जा रहा है। उधर, इस संदर्भ में हिमाचल प्रदेश वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक विनीत कुमार ने कहा कि स्वारघाट में निगम का कोई मंडलीय कार्यालय ही नहीं है। निगम में किसी भी अधिकारी की तैनाती करना सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
