
नूरपुर (कांगड़ा)। सरकार बीपीएल परिवारों को निशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध करवाने के लाख दावे करती हो, लेकिन अकसर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में दवाइयों के अभाव के चलते निजी मेडिकल स्टोरों में जेब ढीली करने वाले गरीबों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। ऐसा ही मामला सामने आया है चिनबा रोड पर। यहां आईटीआई के पास सरकारी संस्थानों में गरीबों को मिलने वाली दवाइयों की सरकारी सप्लाई की बड़ी खेप झाड़ियों में फेंकी गई है। बेशक यह दवाइयां एक्सपायरी डेट की हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि समय रहते इनका इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा सका?
हैरानी की बात है कि बीएएनएस-129 बैच का ऐनासिड सिरप मार्च 2012 में एक्सपायर भी चुका है और दूसरी खांसी की दवा एक्सोजिन (बैच संख्या जेडएएस-11053) भी दिसंबर 2012 में एक्सपायर हो चुकी है। इन दवाओं की बंद बोतलें बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में वैज्ञानिक ढंग से नष्ट करने की बजाय खुले में झाड़ियों में फेंकी गई हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि इन दोनों दवा की बोतलों पर हिमाचल प्रदेश सरकार की बीपीएल परिवारों के लिए सप्लाई की मोहर अंकित है। ऐसे में सवाल उठता है कि इन दवाइयों को एक्सपायरी डेट से पहले वितरित क्यों नहीं किया गया? अगर शार्ट डेट के चलते दवाइयां एक्सपायर हो गईं तो उन्हें सही ढंग से डिस्पोज करने की बजाय खुले में क्यों फेंक दिया गया? हालांकि, इन दवाओं के बैच नंबर की पड़ताल से इतना तो साफ हो गया है कि यह खेप स्वास्थ्य खंड नूरपुर के तहत आने वाले हेल्थ सेंटरों को 2011 में सप्लाई की गई थी। लेकिन आईटीआई के पास खुले में फेंकी गई दवाइयों की खेप किस हेल्थ सेंटर की है, यह जांच का विषय है।
स्वास्थ्य केंद्रों के लिए आई थी सप्लाई
बीएमओ डा. नीरजा गुप्ता ने माना कि उक्त बैच के सिरप व सस्पेंशन की बोतलें वर्ष 2011 में हेल्थ सेंटरों को सप्लाई की गई थीं। लेकिन आईटीआई के पास बरामद बोतलों की मात्रा एक हेल्थ सेंटर को मिलने वाले कोटे से कई गुना ज्यादा हैं। जहां तक एक्सपायरी दवाओं को डिस्पोज करने का सवाल है तो इन्हें कतई खुले में नहीं फेंका जा सकता।
सीएमओ ने बैठाई जांच
धर्मशाला। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. डीएस गुरुंग ने बताया कि नूरपुर में एक्सपायरी दवाइयों को खुलेे में फेंकने के मामले में जांच बैठा दी गई है। बीएमओ गंगथ तथा अन्य अधिकारियों को मौके पर भेजा गया है। जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व कर्मियों पर विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
