
कर्णप्रयाग। पत्नी का ऑपरेशन करवाकर कुछ ही दिन पूर्व देहरादून से नारायणबगड़ पहुंचे थे। सोमवार को मैं पत्नी को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चेकअप के लिए ले गया था, जहां उसे भर्ती किया गया। मैं उसी के साथ अस्पताल में था। लगातार बारिश के चलते बाहर की स्थिति का कुछ पता नहीं चल पा रहा था, लेकिन मुझे फोन आया कि आप का मकान …। मैं सब सुनता रहा, कुछ कहने की हिम्मत ही नहीं हो पाई। बेटी की शादी की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थी। पूरा सामान घर में रखा था। गहने और अन्य चीजें भी आ चुकी थी, लेकिन अब कुछ नहीं बचा है। परिवार रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं।
डबडबाई आंखों से मानूर गांव निवासी गंगा सिंह रावत ने बताया कि उनका 16 कमरों का मकान, दुकान और गोदाम पिंडर नदी में समा चुका है। बताया कि चार बच्चों में सबसे बड़ी बेटी की शादी पहले 22 जून को होनी थी, लेकिन अचानक दिल्ली बैंक में नौकरी करने वाले आदिबदरी बूंगा गांव निवासी उनके दामाद को छुट्टी नहीं मिलने के कारण कुछ दिन पूर्व ही शादी का दिन दशहरों में तय किया गया है। बेटी के गहने 10 जून को घर पहुंच चुके थे, लेकिन 17 जून की रात्रि के 15 मिनट की बारिश ने सारे अरमान धुल दिए।
रावत कहते हैं कि जिदंगीभर की कमाई एक पल में खत्म हो गई है। दो बच्चे देहरादून पढ़ रहे हैं। बेटी की शादी करनी है। पत्नी बीमार है, कैसे होगा यह सब, समझ में नहीं आ रहा है। बीते पांच वर्ष पूर्व भी रावत की दुकान आपदा के कहर से ध्वस्त हुई थी। उस दौरान तो उन्होंने हिम्मत कर फिर घरौंदा बसा लिया था, लेकिन अब हिम्मत जवाब दे रही है। उनकी नम आंखें और कंपकपाएं होंठ उनके दर्द को बयां कर रही थी।
