मुआवजा नहीं, तटबंध बनाने दो

रुड़की। हर साल बाढ़ से तबाही झेलने वाले ग्रामीणों ने प्रशासन को दो टूक कहा कि उन्हें नुकसान का मुआवजा नहीं बल्कि समस्या का स्थायी समाधान चाहिए। इसके लिए भी वह शासन और प्रशासन से कोई मदद नहीं बल्कि तटबंध निर्माण के लिए नदियों से पत्थर उठाने की अनुमति चाहते हैं। लेकिन खनन पर प्रतिबंध होने के कारण प्रशासन ने इस मामले में हाथ खड़े कर दिए हैं।
दो दिन पहले बुग्गावाला के ग्रामीणों ने धूलिया नदी पर क्षतिग्रस्त तटबंध के निर्माण के लिए श्रमदान शुरू कर दिया था। ग्रामीण नदी से पत्थर उठाकर तटबंध निर्माण का काम करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने यह कहकर काम रुकवा दिया कि खनन पर प्रतिबंध है। इसी तरह बंदरजूट, कुड़कावाला, बुधवाशहीद, हरीपुर टोंगिया के ग्रामीण भी अपने क्षेत्रों में पड़ने वाली नदियों के किनारे तटबंध का निर्माण खुद करना चाहते हैं। मंगलवार को जब एसडीएम केके मिश्रा बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने क्षेत्र में पहुंचे तो कई गांवों की जनता ने उनके सामने यह समस्या रखी। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें नुकसान का मुआवजा नहीं चाहिए। मुआवजा नाममात्र का मिलता है और समस्या जस की तस बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना था कि वह बाढ़ से निजात पाने को स्थायी समाधान चाहते हैं। इसके लिए वे खुद ही श्रमदान कर नदियों के किनारे तटबंध बनाने को तैयार हैं। बस प्रशासन नदियों से पत्थर उठाने की अनुमति दे दे। लेकिन एसडीएम ने खनन पर प्रतिबंध होने के कारण अनुमति से इनकार कर दिया। कुड़कावाला के प्रधान सलीम अहमद, बंदरजूट के कलीम, दौड़वसी के सुंदर सिंह, बुग्गावाला की विमलेश का कहना है कि प्रशासन को तटबंध निर्माण के लिए पत्थर चुगान की अनुमति देनी चाहिए।

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