पहला मुआवजा दिया नहीं, दूसरे का आश्वासन

रुड़की। दैवीय आपदा आने पर शासन-प्रशासन पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए दावे तो बहुत करता है, लेकिन शासन-प्रशासन के दावे केवल कागजों तक ही सिमट कर रह जाते हैं। समय बीतने के साथ पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए किए वादों को भी भूला दिए जाते हैं। सदियों में आई बारिश से हुए नुकसान का मुआवजा तो आज तक पीड़ितों को मिला नहीं, अब फिर से पीड़ितों को दैवीय आपदा से हुए नुकसान का मुआवजे का आश्वासन दिया जा रहा है।
बीते जनवरी और फरवरी माह के प्रथम सप्ताह में हुई भारी बारिश के चलते लोगों का काफी नुकसान हुआ था। बारिश के चलते दर्जनों की संख्या में मकानों को नुकसान पहुंचा था। रुड़की, लक्सर, खानपुर, भगवानपुर, बुग्गावाला आदि क्षेत्र में गंगा और नदियों ने किसानों की हजारों बीघा गेहूं, गन्ने, सरसों की फसलें बर्बाद कर दी थी। प्रशासन की ओर से बारिश से हुए नुकसान का आंकलन किया था। रिपोर्ट को शासन को भी भेजा दी थी, लेकिन पांच माह बीत जाने के बाद भी पीड़ितों को मुआवजे के रूप में एक धेला भी नहीं मिला है। वहीं पिछले मानसून में हुए नुकसान का मुआवजा भी आज तक नहीं मिला है।

जब आपदा का मुआवजा ही नहीं दिया जाता है तो हर बार आश्वासन क्यों दिए जाते हैं। सरकार की इसी गलत नीति के कारण आज किसान ही खेती-बाड़ी से मुंह मोड़ता जा रहा है। -महकार सिंह, जिलाध्यक्ष, उत्तराखंड किसान मोर्चा।

कोट…
मैने गत माह ही कार्यभार संभाला है, इसलिए मामले की ज्यादा जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराकर सर्दियों में बारिश से आई आपदा से हुए नुकसान का मुआवजा पीडितों को दिलाए जाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
निधि पांडे, जिलाधिकारी

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