
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ में आए मलबे के सैलाब से बचकर आए कुछ खुशनसीब यात्री उस मंजर को याद करके कांप उठते हैं। इस खौफनाक मंजर को ये ताउम्र नहीं भूल पाएंगे। तीन दिन मौत के साए में बिताने के बाद राहत दल ने बुधवार को कई यात्रियों को बचाया। इनमें से कुछ को फाटा और गंभीर रूप से घायलों को जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग में भर्ती कराया गया है। यहां उन्होंने अपने अनुभवों को ‘अमर उजाला’ से साझा किया।
तीस में से बचे सिर्फ दो
हम तीस लोगों का दल ग्राम कल्योण, उज्जैन मध्य प्रदेश से केदारनाथ की यात्रा के लिए निकला था। 16 जून को हम दर्शनों के लिए धाम में पहुंचे। रात करीब सवा नौ बजे जोरदार आवाज हुई। मैं और मेरा साथी मांगलू सिंह बाहर आए तो देखा कि पानी का सैलाब हमारी ओर आ रहा है। हम नदी की ओर भागे और पेड़ पर चढ़ गए। सब थमने के बाद हम जान बचाकर भागे। पीडब्ल्यूडी के मजदूरों ने हमें तीन दिन तक शरण दी, लेकिन खौफ के कारण रातों को सो नहीं पाते थे। बुधवार को राहत दल ने हमें हेलीकॉप्टर से निकालकर यहां पहुंचाया। मगर हमारे अन्य साथियों की अब तक कोई खबर नहीं मिल पाई है।
राम सिंह पुत्र भंवर सिंह,
दुकान में ली शरण
मैं और मेरा साथी 15 जून को अपने घोड़ों पर यात्री लेकर केदारनाथ पहुंचे थे। रात करीब सवा नौ बजे अचानक पानी का सैलाब आया। मैं किसी तरह भागकर भीमबली पहुंचा और तीन दिन तक दुकान में शरण लेकर रहा। मगर मेरे साथी का कोई पता नहीं है। 18 जून को राहत एवं बचाव दल वहां से निकालकर फाटा लाया।
राकेश लाल, घोड़ा संचालक ग्राम टाट जखोली ब्लॉक
चमत्कार ने बचाया
हम सात लोग पश्चिमी मेदनपुर कोलकाता से यात्रा पर निकले थे। 15 जून को केदारनाथ पहुंचकर भारत सेवाश्रम में रुके। रात को अचानक तेज आवाज आई मैं देखने के लिए बाहर निकला तो, देखा कि सूनामी सी आ गई है। मैं मंदिर की ओर भागने लगा, लेकिन एक थपेड़ा मुझे अपने साथ बहा ले गया। बाद में कुछ लोग मुझे मंदिर के अंदर ले गए। लेकिन दूसरे दिन फिर पानी का सैलाब आया, जो मंदिर के अंदर से सब कुछ बहाकर ले गया। लेकिन पता नहीं क्या चमत्कार हुआ कि मुझे खरोंच तक नहीं आई। हमारे साथ के दो लोगों का अभी पता नहीं है, बाकी का इलाज फाटा में चल रहा है।
राजेंद्र, पश्चिमी मेदनपुर कोलकाता
गौरी गांव में शरण लिए हैं दो हजार यात्री
चार दिन से गौरी गांव में आसरा लिए नवीन गोस्वामी और उनके परिजनाें की उम्मीद अब धीरे-धीरे टूटने लगी है, लेकिन दिल के एक कोने में अभी भी आस है कि जल्द ही हेलीकाप्टर आएगा और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाएगा। नवीन ने बताया कि 16 की रात को गौरीकुंड में बाढ़ आने पर वह परिजनाें के साथ गौरी गांव पहुंचे। गांव में लगभग दो हजार लोगाें ने शरण लिए हुए हैं। लेकिन गांव में अब राशन संकट गहराने लग गया है। उन्हाेंने बताया कि तीन-चार बार हेलीकाप्टर गांव के निकट पहुंचा और बिस्कुट के पैकेट भी फेंके, लेकिन नीचे आते-आते वे खराब हो गए। यदि जल्दी प्रभाविताें को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचाया गया, तो जनहानि होने की संभावना है।
