
बलुवाकोट। बलुवाकोट की मिट्टी बेशक बलुवाई हो मगर काली के किनारे दशकों पूर्व बनी ये इमारतें बेहद मजबूत थी। मगर काली के कोप ने इन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। एक झटके में ये दुकान और मकान ताश के पत्तों की तरह नदी में समा गए। 12 मिनट में दो भवन धराशायी हो गए। वैसे 24 घंटे में यहां 23 मकान इतिहास का हिस्सा बन गए। सात मकान अभी भी खतरे में हैं। सैकड़ों लोगों की जिंदगी भर की कमाई भी बर्बाद हो गई।
बलुवाकोट के इतिहास में यूं तो कई बार बारिश की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पर इस बार काली के कहर ने भारी तबाही मचाई है। लोग बेबस आंखों से इस खौफनाक मंजर को बस देखते रहे। प्रशासन ने दावे तो खूब किए मगर वक्त पर दावों की हवा निकल गई। ग्राम प्रधान हरि राम आर्या का कहना है कि 15 जून तक यहां सब कुछ गुलजार था। लेकिन मूसलाधार बारिश ने काली के किनारे बसे काफी लोगों की जिंदगी को दर्द के आंसू दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि मकान, दुकान और अन्य नुकसान को मिलाकर 15 करोड़ रुपये काली में डूब गए। लोगों का कहना है कि नदी के बड़े बोल्डर के पलटने से नदी की दिशा बदलने से तबाही का इस कदर मंजर हुआ है।
भारी तबाही झेल चुके ये लोग अभी तो इस हाल में भी नहीं है कि भविष्य की सोच सके। उन्हें रात के लिए छत और भोजन के साथ जख्मों पर संवेदना और मदद के मरहम की दरकार है। सीडीओ डा.राघव लंगर और कुछ अन्य प्रशासनिक अफसरों ने यहां का दौरा जरूर किया। प्रशासन ने कुछ इंतजामात तो किए लेकिन वे इतने बड़े जख्म को भरने के लिए नाकाफी है।
कमोबेश ऐसे ही हाल झूलाघाट के भी हैं। यहां 25 से अधिक दुकानें खतरे की जद में आने से उन्हें खाली करवा दिया गया। और अब उनके सम्मुख रात काटने के साथ ही रोजी की भी चुनौती है। जौलजीवी के लोगों का दर्द भी इनसे जुदा नहीं रहा। जौलजीवी झूला पुल ढहा। जौलजीवी मेले का मैदान रोखड़ में तब्दील हो गया। धारचूला, मदकोट आदि में बिजली और फोन सेवा ठप होने से राहत कार्य में ब्रेक लग रहा है।
