पिंडरघाटी के साढ़े तीन सौ गांवों में सात दिन से पसरा अंधेरा

कर्णप्रयाग। थराली तहसील आपदा से पूरी तरह प्रभावित है। यहां नारायणबगड़, थराली और देवाल में सातवें दिन भी बिजली और संचार सेवाएं बहाल नहीं हो पाई हैं। प्रभावितों का अपने सगे-संबंधियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। ऊर्जा निगम की हाईटेंशन लाइनें देवाल से थराली के बीच कई स्थानों पर ध्वस्त हो चुकी है। यही हाल बीएसएनएल सेवा का भी बना हुआ है।
तहसील क्षेत्र के साढ़े तीन सौ गांवों में सात दिन से अंधेरा छाया हुआ है। आपदा के कहर से सहमे लोग छिल्ले की रोशनी में जीवन यापन को मजबूर हैं। ब्लाक मुख्यालय नारायणबगड़, थराली और देवाल खतरे की जद में हैं। यही हाल पर्यटन नगरी ग्वालदम का भी बना हुआ है। बिजली गुल होने के कारण लोगों के मोबाइल फोन की बैटरी भी शून्य हो गई हैं, जिस कारण उनसे किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं हो पा रहा है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र को विद्युत सप्लाई करने वाली हाईटेंशन 66 केवी और 33 केवी विद्युत लाइन के देवाल से थराली और नारायणबगड़ तक कई पोल पिंडर नदी के ऊफान से ध्वस्त हो चुके हैं। इन हालत में बरसाती सीजन में बारिश के चलते निरंतर खतरे की संभावना बनी हुई है। इधर कई प्रयास के बाद भी निगम अधिकारियों के बातचीत नहीं हो पाई।

संचार सेवाएं भी ठप
पिंडरघाटी में बीएसएनएल की संचार सेवा भी ठप पड़ी है। अन्य प्राइवेट संचार नेटवर्क में भी समस्या के चलते स्थिति भयावह बनी हुई है। नारायणबगड़ में भारत संचार निगम का टावर और दूरभाष केंद्र पिंडर नदी में समा चुका है। वहीं सिमली से लेकर नारायणबगड़ तक ओएफसी लाइनें कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे संपर्क की कोई गुंजाइश फिलहाल नहीं बन रही है। बीएसएनएल के एसडीओ बीएस रावत ने बताया कि संचार व्यवस्था को बहाल करने के लिए वैकल्पिक प्रयास किए जा रहे हैं। बुधवार को स्वयं क्षेत्र का दौरा कर उन्होंने बताया कि लाइनें कई स्थानों पर पूर्ण रुप से नष्ट हो चुकी हैं। नई लाइनें बिछाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

10 से 20 रुपये में हो रहे मोबाइल चार्ज
नारायणबगड़ में प्रभावितों सहित स्थानीय लोगों को अपने मोबाइल चार्ज करने के लिए 10 से 15 रुपये देने पड़ रहे हैं। जबकि कुछ लोग विभागीय कार्यालयों में लगे जनरेटर की मदद से अपने मोबाइल फोन चार्ज करा रहे हैं।

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