अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति सामान्य नहीं

खटीमा। बरसात रुकने के 24 घंटे बीतने के बाद शहरी क्षेत्रों में भले ही पानी उतर गया हो, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। अमाऊं ग्राम सभा के लोहियाहेड मार्ग पर बने एक पक्के मकान की दीवार ढह गई। जबकि टेड़ाघाट में एक व्यक्ति के कच्चे मकान की दो दीवारें गिर गई। अलबत्ता कोई नुकसान नहीं हुआ है। इसके अलावा चांदा भुडरिया, नौसर, भगचुरी, रघुलिया, वनगंवा आदि गांवों में आज भी खोतों और संपर्क मार्गों में पानी बह रहा है। सत्रहमील-प्रतापपुर मार्ग कई जगह से टूट गया है। शहरी क्षेत्र में जल भराव क्षेत्रों के नागरिक पानी में डूबे सामान को धूप में सुखाते देखे गए। इधर विधायक पुष्कर सिंह धामी और तहसीलदार एसएस ऐरड़ा ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरान कर मौके के हालातों की सूचना उच्चाधिकारियों को सौंप दी है। विधायक धामी ने ग्रामीणों को उचित मुआवजे और बाढ़ से निजात का आश्वासन दिया है।
लगातार 50 घंटों तक हुई मुसलाधार बारिश थम तो गई, लेकिन बरसात अपने पीछे भयावहता छोड़ गई है। मंगलवार की रात्रि लोहियाहेड रोड निवासी सुधीर कुमार के मकान की पीछे की दीवार पानी की मार नहीं झेल पाई और रात में भरभरा कर गिर गई। जबकि टेड़ाघाट निवासी बब्लू भट्ट के टीन शेड की दो दीवारें जल भराव के कारण गिर गई। पीड़ित से विधायक पुष्कर सिंह धामी से आर्थिक सहायता की मांग की है। इसके अलावा चांदा भुडरिया गांव में आज भी पानी खेतों व संपर्क मार्गों में जमा हुआ है। जिससे ग्रामीणों की कई हेक्टेअर धान व अन्य फसल का नुकसान हो गया है।
जमौर से आगे के कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। सबसे खराब स्थिति भगचुरी व नौसर गांव की है। यहां से सत्रहमील-प्रतापपुर संपर्क मार्ग कई जगह से टूट गया है। इस मार्ग पर बने लोहे के पुल से आवागमन भी प्रभावित हो रहा है। पुल पर परवनी नदी का पानी ओवर फ्लो है। इन गांवों में सर्वाधिक नुकसान अगैती धान लगाने वाले किसानों को हुआ है। कई हेक्टेअर धान की फसल बाढ़ की भेंट चढ़ गयी है। इस फसल का कटाई का समय था लेकिन मानसून पहले आने से इस बार धान खराब हो गया है।

Related posts