ग्रामीणों के पास भी राशन खत्म, कैसे दें शरण

उत्तरकाशी। गंगोत्री हाईवे पर प्रशासन की नजरों से ओझल विभिन्न जगहों पर फंसे चार हजार से ज्यादा यात्रियों के समक्ष भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। गंगनानी, सुनगर, डबराणी के ढाबों में राशन खत्म होने पर यात्री जीवन बचाने के लिए निकटवर्ती गांवों की ओर पहुंच रहे हैं।
भैराेघाटी, झाला, जसपुर, सुक्की, डबराणी, गंगनाणी तथा सुनगर में कहीं होटल ढाबों में राशन नहीं बचा है। सुक्की गांव में ही 950 से ज्यादा यात्री फंसे हैं। ग्रामीणों ने पहले तो यात्रियों को शरण दी, लेकिन अब उनके घर में भी राशन का कोटा खत्म होने लगा है। यही स्थिति गंगनानी तथा सुनगर की भी है। ग्रामीण भी ज्यादा मदद करने की स्थिति में नहीं हैं। कुछ ग्रामीण तो जंगली सब्जियों की पहचान बताकर जीवन बचाने के लिए उन्हें खाने की सलाह दे रहे हैं।
उत्तरकाशी से भटवाड़ी, डबराणी के बीच कई जगह हाईवे गायब होने से प्रशासन के सुविधाभोगी कर्मी व अधिकारियों के वहां न पहुंचने से भूख से तड़प रहे यात्रियों की जानकारी तक नहीं है। ऐसे में यात्रियों का जीवन बचाने के लिए सरकारी इंतजाम का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रशासन का राहत एवं बचाव कार्य सड़क मार्ग तथा सुविधाजनक स्थानों पर सिमट कर रह गया है। नेता और अधिकारी उत्तरकाशी जिला मुख्यालय के आसपास सैरसपाटे वाले अंदाज में मंडरा रहे हैं।

कोट……….
हमारे गांव में करीब 950 यात्री ठहरे हैं। यहां के होटलों में दो सौ यात्रियों को ठहराने की व्यवस्था है। बाकी गांव में ठहरे हैं। अब गांव में भी लोगों का राशन खत्म हो रहा है। ऐसे में यात्रियों की मदद करें या फिर अपने बच्चों के पेट की सोचें। प्रशासन की ओर से अब तक कोई मदद नहीं आई है।- मोहन सिंह, निवासी सुक्की गांव।

जान हथेली पर लेकर बचते फिर रहे यात्री
उत्तरकाशी। रविवार की रात को सैंज के पास दिल्ली वालों की धर्मशाला बाढ़ में बह गई। वहां सैकड़ों लोग ठहरे थे। जिन्हें जान बचाकर जंगलों में शरण लेनी पड़ी। उत्तरप्रदेश के चार बुजुर्ग यात्री रात को बदहवास होकर जान बचाने के लिए पहाड़ी पर जंगल की ओर भागे। कई किमी चलने के बाद उन्हें निर्जन गोशाला में शरण लेनी पड़ी। 72 वर्षीय सीता किशोरी सिंह, 65 वर्षीय शीला सिंह, ऋतुराज सिंह, वंशराज सिंह ने यहां दो रातें बिना खाना पानी के नंगी जमीन पर अलाव जलाकर गुजारीं। दो लोग रात को जंगल की ओर भागते समय चोटिल हो गए। किसी तरह मनेरी थाने की पुलिस तीसरे दिन इन यात्रियों तक पहुंची और उन्हें मनेरी सेवाश्रम के सुपुर्द किया। अब ये बीमार व घायल बुजुर्ग यात्री घर लौटने के लिए हाईवे ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं।

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