उत्तराखंड में अभी भी फंसे हैं 62000 तीर्थयात्री, हजारों के मरने की आशंका

उत्तराखंड में अभी भी फंसे हैं 62000 तीर्थयात्री, हजारों के मरने की आशंका

देहरादून: आपदाग्रस्त उत्तराखंड में अभी भी 62,000 से अधिक तीर्थयात्री व पर्यटक फंसे हुए हैं जबकि 15,000 को अब तक सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है। भारी बारिश और बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित उत्तराखंड में हजारों लोगों के मारे जाने की आशंका के बीच आज राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया गया है तथा केदारनाथ में फंसे लोगों को वहां से निकालने के लिए भारतीय वायु सेना के आठ अतिरिक्त हेलीकाप्टर लगाए गए हैं। बाढ़ और बादल फटने के कारण केदारनाथ में भारी नुकसान हुआ है।

राज्य आपदा राहत और प्रबंधन केंद्र ने कहा है कि 90 धर्मशालाओं के अचानक आई बाढ़ में बह जाने के कारण प्रभावित क्षेत्र में मरने वालों की संख्या हजारों तक पहुंच सकती है। हालांकि आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या 150 बतायी गई है। पुलिस महानिरीक्षक आर एस मीणा ने प्रेट्र से कहा कि हेमकुंड साहिब के रास्ते में केदारनाथ और गोविंदघाट में फंसे 15,000 लोगों को निकालकर वायु एवं सड़क मार्ग से जोशीमठ स्थित राहत शिविर लाया गया है।

प्रशासन बारिश और बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को बाहर निकालने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। मीणा ने कहा, ‘‘प्रभावित इलाकों में बचाव एवं राहत अभियान में पहले से लगाये गए 12 हेलीकाप्टरों के अलावा अभियान को तेज करने के लिए आठ और हेलीकाप्टरों को लगाया गया है।’’ उन्होंने कहा कि अभी राहत अभियान बारिश से सबसे अधिक प्रभावित रूद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ मंदिर और इसके आसपास के इलाकों में केंद्रित है जहां 90 धर्मशालाएं बह गई हैं, जिसमें तीर्थयात्री ठहरे हुए थे।

देहरादून से दो हेलीकाप्टरों ने इलाके में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए उड़ान भरी। सेना ने भी तीर्थयात्रियों को बाहर निकालने के लिए पर्वतीय बचाव दल को लगाया है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि जबर्दस्त बाढ़ के कारण रूद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिले में काफी स्थानों पर अभी तक नहीं पहुंचा जा सका है और इस आपदा के कारण हुई क्षति का आकलन करना असंभव हो गया है। बड़ी संख्या में गांव अभी भी पानी में डूबे हुए हैं। उन्होंने कहा कि इसके कारण मरने वाले लोगों की संख्या के बारे में अनिश्चितता है।

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