
शिमला। घूमने के बहाने शिमला लाए गए आठ बाल मजदूरों को सब्जी मंडी से पुलिस की मानव व्यापार निरोधक इकाई ने छुड़ा लिया है। सभी बच्चों की उम्र 12 से 14 साल के बीच है। इनमें 6 बच्चे नेपाल और और 2 उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं। 5 बच्चों को पोल्ट्री फार्म और 3 बच्चों को ढाबों से छुड़ाया गया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस के साथ चाइल्ड हेल्प लाइन के सदस्य भी मौजूद रहे।
सभी बच्चे डेढ़ से दो महीने से यहां काम कर रहे थे। पोल्ट्री फार्म में बदबू भरे वातावरण में इनसे काम करवाया जा रहा था। एक कोठरीनुमा जगह पर बच्चे बैठे थे और ट्रे को अंडों से भर रहे थे। इनमें से अधिकांश बच्चों को घूमने के बहाने शिमला लाया गया। लाने वाला कोई और नहीं बल्कि इनके रिश्तेदार हैं जो व्यवसायियों से संपर्क साधकर गरीब परिवार के बच्चों को यहां लाते हैं और काम पर लगा देते हैं। इसकी एवज में ये मोटी कमीशन पाते हैं। सभी बच्चों को मेडिकल के लिए अस्पताल ले जाया गया। मेडिकल के बाद इनकी उम्र के बारे में भी पूरी जानकारी मिल पाएगी। इसके बाद इन्हें चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष पेश किया जाएगा।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि जिन कारोबारियों के यहां ये बच्चे मिले हैं, कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। जब तक बच्चों के अभिभावकों से संपर्क नहीं हो पाता, इन्हें टुटीकंडी बाल आश्रम में रखा जा रहा है। इसकी पुष्टि पुलिस अधीक्षक अभिषेक दुल्लर ने की है।
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बच्चों को लाने वाला गिरोह सक्रिय
शिमला। गरीब परिवारों को सब्जबाग दिखाकर नाबालिग बच्चों को शिमला लाकर व्यापारियों के सपुर्द करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। कुफरी में घोड़ा संचालकों के यहां से आठ बच्चों को छुड़ाया गया था। सभी बच्चे असम के रहने वाले थे। इन्हें एक महिला यहां लेकर आई थी। पुलिस का कहना है कि एक संगठित गिरोह है, जो इस तरह के कृत्य को अंजाम दे रहा है। पैसे के लालच में मासूमों की जिंदगी के सौदे कर रहा है। शहर के लगभग हर नुक्कड़ में दुकानों और ढाबों के अलावा कई घरों में भी मासूम काम करते हुए देखे जा सकते हैं। यहां भी पुलिस कार्रवाई करने का दावा कर रही है।
