
बिलासपुर। कारपोरेट सेक्टर में बढ़ रही संभावनाओं और अंग्रेजी की महत्ता के बावजूद नई पीढ़ी को अंग्रेजी में दिलचस्पी नहीं है। रूसा लागू होने के बाद एक तरह से अंग्रेजी के पचड़े में फंसने से विद्यार्थियों को छुटकारा मिल गया है। प्रथम वर्ष के छात्रों ने मेजर विषय में अंग्रेजी से किनारा किया है। यह जानते हुए भी कि वर्तमान में किसी भी क्षेत्र में अंग्रेजी ही एकमात्र साधन है। जिसके दम पर बेहतर जॉब हासिल की जा सकती है। बच्चों ने माइनर विषय में अंग्रेजी विषय चुना है। मेजर विषय में अंग्रेजी के प्रति बच्चों की खास रुचि नहीं रही है।
राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत इस बार प्रथम वर्ष के छात्रों को नए नियमाे के तहत दाखिला दिया जा रहा है। मेरिट के आधार पर इन स्टूडेंट्स को प्रवेश मिलेगा। प्रवेश प्रक्रिया के लिए विद्यार्थियों ने मेजर, माइनर, जरनल हाबी विषय चुने। इसमें नए विद्यार्थियों ने अंग्रेजी विषय से किनारा किया है। जानकारी के अनुसार राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बिलासपुर में 19 जून तक प्रथम वर्ष के 780 छात्रों ने कालेज प्रशासन के पास अपने आवेदन जमा करवाए हैं। बीएससी-1 में 380, बीकॉम-1 में 150 तथा बीए-1 में 250 बच्चों ने आवेदन जमा करवाए है। इनमें से अधिकतर ने अंग्रेजी को मेजर विषय के तौर नहीं चुना। इसमें केवल 10 बच्चों ने ही रुचि दिखाई। शेष बच्चों ने अंग्रेजी को माइनर विषय के तौर पर चुना है।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बिलासपुर के प्राचार्य आरपी चोपड़ा ने कहा कि रूसा के तहत किसी भी विषय को चुनने के लिए बच्चों को बाध्य नहीं किया जा सकता है। बच्चे अपनी रुचि के अनुसार विषय पढ़ेंगे। कालेज में अधिकतर बच्चों ने अंग्रेजी विषय को माइनर विषय के रूप में चुना है। मेजर विषय के तौर पर कुछ ही बच्चों ने रुचि दिखाई है।
