
पौड़ी। नवांकुर की पहल पर आयोजित राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के अंतिम दिवस पर बेला थिएटर ने ‘मसखरे’ नाटक की प्रस्तुति दी। ‘मसखरे’ अन्तोन चेखव की लिखी बंदरगाह और हंस गीत कहानी का एकीकरण है। पूरा नाटक हास्य कलाकारों की मेहनत और उनकी दिनचर्या की ओर घूमता है। मंच से लोगों को हंसा-हंसाकर लोटपोट करने वाले मसखरे के जीवन में क्या दर्द होता है यह नाटक में दिखाया गया।
समुद्र तट पर कई मसखरे अपने जीवन को दांव पर लगाकर पर्यटकों को लुभाने की कोशिश करते हैं। आखिर में सारे मसखरे अपने घरों को जाते हैं, लेकिन एक आखिर तक पानी में करतब दिखाता है। इसी दौरान उसकी मौत हो जाती है। दूसरे मसखरों को मौत का दुख होता है, लेकिन उनका जोखिम उठाने का सफर खत्म नहीं होता। अमर शाह के निर्देशन में हुई इस प्रस्तुति में चिराग भनोट, अमित, तुषार, सनद, लासिम, राहुल गाबा, जितेंद्र नागर, फरह, धारणा चौहान, दीपक आदि ने अभिनय किया। आयोजन समिति के अध्यक्ष अशोक बौड़ाई ने सफल आयोजन में सहयोग के लिए सभी का आभार जताया।
