
हल्द्वानी। हमने इस देश को आजादी दिलवाई। आजादी के लिए जान पर खेले, मगर हमें और हमारे परिवारों को आज उपेक्षा की नजरों से देखा जा रहा है। न सम्मान मिला न सुविधाएं। बस सरकारी घोषणाएं और दिखावे के शासनादेश। हम अपनी लड़ाई की कीमत नहीं मांगते, मगर कम से कम हमें जरूरी सुविधाएं और सम्मान का दर्जा तो मिले। ये कहना है वयोवृद्घ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामदत्त जोशी का। 97 साल की उम्र में भी वे खुद चलकर रामपुर रोड स्थित युवा भवन में आयोजित उत्तराखंड स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं उत्तराधिकारी सम्मेलन में पहुंचे थे। कुमाऊं में पहली बार हुए इस सम्मेलन में प्रदेश भर के स्वतंत्रता सेनानी और उनके परिवार भी आए।
सम्मेलन का उद्घाटन कैबिनेट मंत्री डा.इंदिरा हृदयेश और हरीश दुर्गापाल ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के आगे दीप प्रज्ज्वलित कर किया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. लक्ष्मी दत्त पंत के पौत्र नितिन पंत और पौत्रवधु मेधा पंत की राष्ट्रगीत प्रस्तुति के बाद सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। वक्ताओं ने एक-एक कर अपनी समस्याएं रखी। इस अवसर पर एक मांग पत्र और 35 शासनादेशों की कॉपी भी कैबिनेट मंत्री डा.हृदयेश को सौंपी गई। उन्होंने शासनादेशों पर अमल करवाने का आश्वासन दिया, जबकि कैबिनेट मंत्री दुर्गापाल ने हर संभव मदद सरकार की ओर से देने की बात कही। सम्मेलन का संयोजन नवीन चंद पंत और मयंक शर्मा ने किया, जबकि अध्यक्षता वयोवृद्घ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोहन सिंह अधिकारी और संचालन एचआर बहुगुणा ने किया। इस दौरान पार्षद शोभा बिष्ट, पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा, स्वतंत्रता सेनानी मोती सिंह, नरेंद्र पंत, नवीन चंद्र जोशी, आशीष ढौडियाल, महेश चंद्र, ललित पंत समेत बागेश्वर, उत्तरकाशी, चमोली, पौड़ी, देहरादून, पिथौरागढ़, हल्द्वानी सहित कई जिलों से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और उनके परिजन आए थे।
‘धरोहर’ का विमोचन
डॉ.इंदिरा हृदयेश ने स्वतंत्रता सेनानी और उनके परिवारों के इतिहास पर लिखी पिथौरागढ़ के साहित्यकार राजेश सिंह उप्रेती की पुस्तक ‘धरोहर’ का विमोचन किया। इस पुस्तक में 240 परिवारों का इतिहास संजोया गया है, जबकि 1921 से लेकर अब तक स्वतंत्रता सेनानियों को मिले जेल सर्टिफिकेट का भी संयोजन है।
