एक सिगरेट के धुएं में उड़े रहे जिंदगी के 11 मिनट

शिमला। शिमला को धूम्रपान मुक्त जिला घोषित कर दिया गया है। उपायुक्त दिनेश मल्होत्रा ने इस आशय का प्रमाण पत्र जारी किया। आईजीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने बताया कि सर्वे में पांच मापदंडों को लिया गया। इसमें सार्वजनिक और कार्य स्थलों पर धूम्रपान की घटनाएं, होटल, ढाबों के आसपास बीड़ी-सिगरेट के टोटों का पाया जाना, इन स्थानों पर धूम्रपान की गंध और इन स्थानों पर तंबाकू निषेध चेतावनी के बोर्डों का लगा होना सर्वे के आधार रखे गए। इस सर्वे के मुताबिक जिला शिमला में तंबाकू निषेध अधिनियम 2003 की धारा 4 में 92.17 प्रतिशत उपरोक्त आधारों की अनुपालना पाई गई।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में अभी तक 60 हजार लोगों के इस अधिनियम के जरिये चालान काटे जा चुके हैं। स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी जिला शिमला डा. महेश जस्वाल ने बताया कि तंबाकू के धुएं में 4000 तरह के विषैले रसायन होते हैं जो मनुष्य के स्वास्थ्य को बड़ी हानि पहुंचाते हैं। प्रत्येक सिगरेट मनुष्य के जीवन को 11 मिनट कम कर देती है।
विश्व में 55 लाख लोग और भारत में 10 लाख लोग तंबाकू के सेवन से जुड़ी बीमारियों की वजह से काल का ग्रास बनते हैं। मुंह के कैंसर के 100 मामलों में से 95 तंबाकू सेवन से जुडे़ होते हैं। हिमाचल प्रदेश वालंटियर हेल्थ एसोसिएशन के निवास जोशी ने कहा कि प्रदेश में 21 प्रतिशत, पंजाब में 12 प्रतिशत चंडीगढ़ में 14 प्रतिशत और गोवा में मात्र 8 प्रतिशत लोग धूम्रपान करते हैं। प्रदेश में 15 सेे 17 वर्ष तक के 16 प्रतिशत तथा 18 से 19 वर्ष के 21 प्रतिशत बच्चे धूम्रपान करते हैं। इससे निष्कर्ष निकलता है कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में धूम्रपान और नशे के प्रति जागरूकता फैलानी जरूरी है।

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