
चंडीगढ़: देश में परिंदों और जानवरों की हिफाजत की जिम्मेदारी संभालने वाली पीपल फॉर एनिमल्स (पी.एफ.ए.) की चैयरपर्सन मेनका गांधी और उनकी संस्था से जुड़े सदस्य उल्टा पक्षी और जानवरों के साथ कथित रूप से निर्दयी व्यवहार की वजह से अदालत के पचड़े में फंस गए हैं।
मामले में सैक्टर-20 निवासी विनोद कुमार ने मेनका गांधी और अन्यों के खिलाफ शुक्रवार को यहां की चीफ ज्यूडीशियल मैजिस्ट्रेट (सी.जे.एम.) की अदालत में सी.आर.पी.सी. की धारा 200 के तहत आपराधिक शिकायत दायर की है। शिकायत में मेनका गांधी के अलावा संस्था से जुड़े गौरव गुप्ता, चेतन शर्मा, पायल सोढी और दीपिका को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
अदालत ने मामले में गवाहियां दर्ज करने के लिए 5 जुलाई की तिथि निर्धारित की है। याचिका में प्रतिवादी पक्ष पर पुलिस अथॉरिटी को गलत सूचना देने का आरोप लगाया गया है, साथ ही सभी को समन जारी करने के साथ पक्षी और जानवरों के साथ निर्दयी व्यवहार किए जाने पर कार्यवाही की मांग की है।
मामला
याचिकाकर्ता का आरोप है कि पी.एफ.ए. की चंडीगढ़ यूनिट 25 मई को सुप्रीम कोर्ट के आर्डर का हवाला देकर उनकी दुकान से जबरदस्ती 142 पक्षी ले गई थी। याचिकाकर्ता के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया, जबकि 29 मई को जिला अदालत ने पी.एफ.ए. को याचिकाकर्ता को उसके 142 पक्षी वापिस करने के निर्देश दिए।
इस पर पी.एफ.ए. केवल 108 पक्षी ही वापिस कर पाया। जिसमें एक पक्षी मरा पाया गया। वहीं याचिकाकर्ता के वकील राजेश शर्मा के मुताबिक अदालत के आदेश (रिलीज आर्डर ) लेकर पी.एफ.ए. के पास गए तो उन्हें 33 पक्षियों के मरे होने के बारे में बताया गया। याचिकाकर्ता के वकील का आरोप है कि उनके क्लाइंट पर उन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया, जिसमें कानून के अनुसार मामला दर्ज नहीं हो सकता था।
