ईको सेंसेटिव जोन के खिलाफ क्षेत्रवासियों ने दिया धरना

रामनगर। ईको सेंसेटिव जोन के खिलाफ एकजुट क्षेत्रवासियों ने बृहस्पतिवार को कार्बेट टाइगर रिजर्व मुख्यालय पर धरना दिया। उन्होंने सभी वन मोटर मार्गों के डामरीकरण समेत इन सड़कों पर आम यातायात की बहाली की मांग की।
धरनास्थल पर हुई सभा में उक्रांद नेता पीसी जोशी ने बताया कि केंद्र सरकार ने गत वर्ष गोमुख-गंगोत्री क्षेत्र को ईको सेंसेटिव जोन घोषित किया था। इसी दौरान प्रदेश सरकार ने भी गत वर्ष 16 नवंबर को जारी शासनादेश के तहत कार्बेट टाइगर रिजर्व के आंतरिक 46 राजस्व ग्रामों समेत इसकी बाहरी परिधि में दो किमी दूरी तक स्थित गांवाें में भूमि उपयोग परिवर्तन पर रोक लगा दी है, जिस कारण इन गांवों की कृषि भूमि पर होटल, रिसोर्ट, उद्योग जैसी वाणिज्यिक गतिविधियां नहीं हो सकती हैं। वहां पर वाणिज्यिक भवन निर्माण की भी अनुमति नहीं मिल सकती। इसके अनुपालन में विनियमित क्षेत्र के रूप में एसडीएम कार्यालय से नक्शे तक पास नहीं हो रहे हैं। पूर्व प्रमुख शिवराज सिंह रावत बताते हैं कि नए नियम के अनुपालन में कृषि भूमि के रेट गिर गए हैं जबकि पहले ही अकृषक घोषित जमीनों के रेट बढ़ गए हैं। जिसका लाभ आम ग्रामीणों की बजाय पेशेवर लोगों को ही मिल रहा है। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के प्रधान महासचिव प्रभात ध्यानी ने रामनगर से कालागढ़, कोटद्वार, मैदावन, सीतावनी समेत सभी वन मोटर मार्गों को वर्षभर आवाजाही के योग्य बनाने की मांग की। ग्रामीणों ने जल, जंगल, जमीन पर स्थानीय समुदायों के अधिकारों की बहाली होने तक बेमियादी आंदोलन चलाने का संकल्प लिया है। धरना देने वालों में ग्राम प्रधान पान सिंह, पूर्व प्रधान केएस मनराल, ललित जोशी, विपिन पांडे, संजय नेगी, विमला आर्या, दिनेश पपनै, मो. जाहिद, विमला आर्या, ललिता पंवार, धनेश्वरी घिल्डियाल, आनंद पांडे, दीप गुणवंत आदि शामिल रहे।

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