संक्रमण दौर में भारत का जनतंत्र: प्रो. बड़थ्वाल

जयहरीखाल। कुमांऊ विवि के पूर्व कुलपति प्रो. सीपी बड़थ्वाल ने कहा कि भारत में जनतंत्र वर्तमान दौर में संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। इसमें सुधार की आवश्यकता है। इसमें भविष्य में बड़े और सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।
प्रो. बड़थ्वाल यहां राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जयहरीखाल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के अंतिम दिन मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय संसदीय प्रणाली ब्रिटेन से अति प्रभावित है इसलिए इसमें ब्रिटिश प्रणाली की खामियों का होना स्वाभाविक है। यही वजह है कि छह दशक पुराने लोकतंत्र में आज भी हमारी शासन प्रणाली में खामियां नजर आती हैं। लेकिन इतनी लंबी अवधि में मतदाताओं की जागरूकता कई गुना बढ़ चुकी है। प्रो. बड़थ्वाल ने विश्वास जताया कि आने वाली पीढ़ी संघीय राज्य ढांचे में वर्तमान विसंगतियों को दूर कर एक कामयाब लोकतंत्र का मार्ग प्रशस्त करेगी।
आईपीएस प्रो. संजीव शर्मा ने कहा कि दक्षिण एशियाई देशों में बढ़ती असहिष्णुता की प्रवृति लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसके अलावा इन देशों में न्यायिक ढांचा चुस्त नहीं है। उन्होंने कहा कि मीडिया भी कहीं न कहीं राजनीतिक संरक्षण से सम्मोहित है। जिससे जन आकांक्षाओं की पूर्ति में कई तरह की बाधाएं पैदा हो जाती हैं। प्रो. शर्मा ने भ्रष्टाचार को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि नौकरशाहों की आड़ में विकास का धन हड़पने वाले गैर सरकारी संगठन लोकतांत्रिक भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं।
हंस फाउंडेशन के उत्तराखंड प्रभारी पदमेंद्र बिष्ट ने कहा कि लोकतंत्र के लिए चारित्रिक पतन एक बड़ी चुनौती है। इससे निपटकर ही हम सही मायनों में विकास की कल्पना कर सकते हैं। सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डा. आरके गुप्ता ने सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को लोकतंत्र की बुनियादी अवधारणाओं को समझना होगा। इस अवसर पर डा. संध्या मीणा, डा. रेखा द्विवेदी, डा. अंजना जोशी, प्रो. ईश्वर भारद्वाज, प्रो. एलसी जोशी , प्रो. अरुण गोपदास , डा. आरके सिंह आदि ने विचार व्यक्त किए। संचालन डा. संजय कुमार ने किया।

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