
नई टिहरी। एवरेस्ट विजेता अरविंद रतूड़ी का जिला मुख्यालय पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। यहां नगर पालिका में आयोजित कार्यक्रम में अरविंद ने कहा कि एवरेस्ट चढ़ना उतना मुश्किल नहीं है, जितना कि इसके लिए चयनित होना है। उन्होंने कहा कि एवरेस्ट फतह करने की खुशी शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
19 मई की सुबह साढ़े सात बजे एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के बाद पहली बार नई टिहरी पहुंचे पर्वतारोही को पालिकाध्यक्ष उमेशचरण गुसाईं ने सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने अपना अनुभव बांटते हुए कहा कि एवरेस्ट पर भी आवागमन बढ़ने से पर्वतारोहियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर साहसिक खेलों की अपार संभावनाएं हैं। युवाओं में जोश तो है, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से उन्हें प्रोत्साहन देने की जरूरत है। इस मौके पर एनसीसी ऑफिसर डा. कुलदीप सिंह, मोहन सिंह रावत, डा. संजीव नेगी, डा. राजेश कुमार, विकास भंडारी, विक्रम तोपवाल, कर्ण डोभाल, मानवेंद्र रावत, आदित्य शंकर खत्री, हनुमंत महर सहित कई युवा शामिल थे। दूसरी ओर इस युवा पर्वतारोही का अपने गांव रिंडोल पहुंचने पर जगह-जगह ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने कहा कि अरविंद ने युवाओं के लिए साहसिक खेलों में नई संभावना पैदा की है। इस मौके पर कई ग्रामीण मौजूद थे।
उत्तराखंड का सबसे कम उम्र का पर्वतारोही
नई टिहरी। विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाले एनसीसी कैडेट अरविंद रतूड़ी (21) ने उत्तराखंड का सबसे कम उम्र का पर्वतारोही होने का गौरव हासिल किया है। वह जिले का पहला नागरिक है, जिसने एवरेस्ट फतह किया। इससे पहले जिले के जिन लोगों ने एवरेस्ट पर चढ़ने में कामयाबी पाई, वह सब सेना से जुड़े थे।
पीजी कालेज के एनसीसी कैडेट अरविंद ने 19 मई को नौ एनसीसी और नौ सदस्यीय आर्मी दल के साथ एवरेस्ट फतह किया था। जाखणीधार प्रखंड में ग्राम रिंडोल निवासी खुशीराम के पुत्र अरविंद ने जिला सहसिक खेल विभाग की ओर से धारकोट में किए गए शुरूआती बेसिक एडवेंचर फाउंडेशन प्रशिक्षण लेकर एवरेस्ट फतह किया। बाद में एनआईएम उत्तरकाशी से प्रशिक्षण लिया। अपने जोश और जज्बे के साथ अरविंद ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने में सफलता पाने के साथ ही उत्तराखंड का सबसे कम उम्र का पर्वतारोही होने का गौरव भी प्राप्त किया है।
