नदी के बढ़ते जलस्तर से आबादी क्षेत्र को खतरा

उत्तरकाशी। भागीरथी नदी का जल स्तर बढ़ने से नगर के तटवर्टी क्षेत्रों पर खतरा मंडराने लगा है। जड़भरत घाट पर पुरीखेत वाले हिस्से से कटाव बढ़ता जा रहा है। जिससे आवासीय भवन भी कटाव की जद में आ सकते हैं। सिंचाई विभाग ने पानी के तेज बहाव को देखते हुए इस हिस्से पर सुरक्षा कार्य करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
दो दिनों से हो रही बारिश से भागरथी नदी का जल स्तर बढ़ता जा रहा है। बीते साल अगस्त माह में आई बाढ़ के मलबे से नदी का तल ऊंचा होने से नगर के तटवर्ती क्षेत्रों के लोग भय के साये में रातें काट रहे हैं। गंगोरी, लक्षेश्वर, केदारघाट, जडभरत घाट तथा मणिकर्णिका घाट पर नदी के तेज बहाव से खतरा बना हुआ है। जड़भरत घाट पर पुरीखेत वाला हिस्सा ढहने लगा है। इस हिस्से के बाहरी मार्ग पर भी दरारें आ गई हैं, जो कभी भी नदी में समा सकता और आबादी क्षेत्र को खतरा हो जाएगा।

बीते साल की बाढ़ में ऊंचे हुए नदी तल की वजह से दिक्कतें आ रही हैं। सिंचाई विभाग खतरे वाली पुरीखेत वाली साइट पर वायर क्रेट डालकर सुरक्षा उपाय करने को कहा गया है। खतरे की जद में आ रही तटवर्ती आबादी को विस्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है।- डा.आर.राजेश कुमार, डीएम उत्तरकाशी।

जड़भरत घाट पर कटाव रोकने के लिए वायरक्रेट लगाई जाएगी। इन दिनों पानी बढ़ने से काम करने में दिक्कत है। लेकिन जल्दी ही यह काम पूरा किया जाएगा। हालांकि इसके लिए कोई समय सीमा नहीं बताई जा सकती। तटवर्ती क्षेत्र की सुरक्षा के लिए हर संभव कोशिश की जाएगी।- चंद्रशेखर, ईई सिंचाई विभाग

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हादसों को न्यौता दे रहे नगर के स्नान घाट
उत्तरकाशी। बरसात का सीजन शुरू होने पर भागीरथी उफान मारने लगी है। असुरक्षित हुए नगर के स्नान घाट हादसों को न्यौता दे रहे हैं।
यमुनोत्री व गंगोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव काशी विश्वनाथ की नगरी उत्तरकाशी में गंगा स्नान का बड़ा धार्मिक महत्व है। यही वजह है कि देश-विदेश से आ रहे तीर्थयात्री भी यहां गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करते हैं। नगर क्षेत्र में करीब एक दर्जन प्राचीन स्नान घाट हैं। पिछले वर्ष अगस्त की बाढ़ ने इन घाटों को खासा नुकसान पहुंचाया। अब नदी के बहाव से छेड़छाड़ से पानी बढ़ने पर सभी स्नान घाट जलमग्न हो गए हैं।
ऐसे में इन घाटों पर श्रद्धालुओं को जान जोखिम में डालकर गंगा स्नान करना पड़ रहा है। जिससे यहां हादसे की आशंका बनी हुई है। पूर्व में यहां स्नान करते हुए कई श्रद्धालुओं की नदी में बहने से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद न तो स्नान घाटों यात्रियों को खतरे की सूचना दी जा रही है और न ही यहां सुरक्षा व बचाव के कोई इंतजाम हैं।

आपदा पूर्व तैयारियों में जुटा प्रशासन, सतर्क रहें
यात्रा मार्गों पर जेसीबी रखने के दिए निर्देश
– आईटीबीपी से भी की सहयोग की अपेक्षा
– तहसील स्तर कंट्रोल रूप बनाने को कहा
उत्तरकाशी। बरसात शुरू होते ही प्रशासन को आपदा प्रभावितों की याद आने लगी है। डीएम ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा कार्यों को एक सप्ताह में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। संगमचट्टी और डिगिला में कमिशभनर के निर्देश पर भी अब तक वैली ब्रिजों का निर्माण शुरू नहीं हो पाया। अब डीएम ने फिर से लोनिवि को तीन दिन का समय दे दिया है।
मंगलवार को डीएम डा. आर.राजेश कुमार ने कहा कि आपदा प्रबंधन ने छह डेस्क सिस्टम तैयार किया है, जिनमें नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। डीएम ने तटवर्टी क्षेत्रों में कटाव रोकने के लिए वायक्रेट लगाने के सिंचाई विभाग को निर्देश दिए। आपदा प्रबंधन को तहसील स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित करने को कहा। बीआरओ से गंगोत्री व यमुनोत्री मार्ग पर भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त जेसीबी रखने को कहा गया। उन्होंने आपदा के दौरान आईटीबीपी से सहयोग की अपेक्षा की।

… तो हेलीकाप्टर से पहुंचेगा रसद
डीएम ने लोनिवि को निर्देश दिए कि ऐसे गांवों को चिह्नित करने के निर्दश दिए, जहां सड़क और संपर्क मार्ग बंद होने की संभावना है। ऐसे गांवों में जरूरत पड़ने पर हेलीकाप्टर से रसद पहुंचाई जाएगी। जिला पूर्ति विभाग को प्रभावित गांवों में अभी से पर्याप्त रसद उपलब्ध रखने को कहा।

शिफ्टिंग के लिए चयनित करें स्थान
डीएम ने संबंधित विभागाे को निर्देश दिए कि वह शिफ्टिंग के लिए अभी से स्थान चयनित कर दें, ताकि आपदा के दौरान दिक्कत न हो। शिक्षा विभाग को शिविर लगाने के लिए स्कूलों की सूची देने को कहा।

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