कई होटलों को नाले के पानी की सप्लाई!

शिमला। हिल्सक्वीन में सैलानियों की जेब ही नहीं काटी जा रही बल्कि उनकी सेहत से भी खिलवाड़ हो रहा है। शहर के आसपास गंदे नालों से पानी भर कर टैंकरों के माध्यम से कई होटलों तक पहुंचाया जा रहा है। पानी ढोने का धंधा पूरी तरह अवैध तरीके से चल रहा है। शहर में चल रहे पानी के अधिकतर टैंकर परिवहन विभाग के पास पंजीकृत ही नहीं हैं।
सैलानियों की आमद में बढ़ोतरी के बाद शहर में पानी की किल्लत हो गई है। होटलोें के लिए कारोबारी निजी टैंकरों से पानी मंगवा रहे हैं लेकिन पानी की गुणवत्ता की जांच नहीं की जा रही। होटलों में हर काम इसी पानी से किया जा रहा है। विभाग के पास पानी ढोने वाले सिर्फ 29 टैंकर पंजीकृत हैं जबकि डेढ़ सौ से अधिक टैंकर अवैध रूप से पानी के धंधे में लगे हैं। पानी के इस कारोबार में जमकर टैक्स चोरी की जा रही है। नियमों के अनुसार व्यावसायिक प्रयोग में आने वाले सभी वाहनों का कामर्शियल वर्ग में पंजीकरण आवश्यक है। बावजूद इसके पानी के टैंकरों को पंजीकृत नहीं करवाया गया है। राजधानी के होटल संचालक गैर पंजीकृत टैंकरों से अपने होटलों के लिए पानी की सप्लाई ले रहे हैं।

दूषित पानी का प्रयोग सही नहीं : कुकरेजा
सीजन के दौरान होटलों के लिए टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ता है, लेकिन इस्तेमाल से पहले पानी की जांच की जाती है। होटलों में दूषित पानी का प्रयोग करना सही नहीं है। ऐसे करने से टूरिस्ट की सेहत ही नहीं बल्कि पूरे पर्यटन व्यवसाय की सेहत खतरे में डाली जा रही है।
– हरनाम सिंह कुकरेजा
अध्यक्ष, होटलियर एसोसिएशन

विस्लरी ही पीते है टूरिस्ट : सुरेंद्र जस्टा
टूरिस्ट हेल्थ को लेकर बहुत जागरूक हैं। पीने के लिए सिर्फ विस्लरी का इस्तेमाल करते हैं। टंकी और नलकों का पानी तो सिर्फ टायलेट के लिए यूज होता है।
– सुरेंद्र जस्टा
उपनिदेशक, पर्यटन विभाग

पानी के टैंकर के रेट
नगर निगम 1665 रुपये प्रति चार हजार लीटर
निजी टैंकर 2000 से 2500 रुपये प्रति चार हजार लीटर

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