
हल्द्वानी/नैनीताल। जिस सुनियोजित ढंग से नाकाबिल लोगों को कुमाऊं विश्वविद्यालय की फर्जी मार्कशीट दी जा रही थी उससे तय है कि तमाम ऐसे लोग नौकरियां पाकर विशेष पदों तक पहुंच गए होंगे। पुलिस ने दो महीने बाद ही सही मामला दर्ज कर लिया है। अब सवाल उठता है कि यह गोरखधंधा अगर सालों से चल रहा है तो इसकी खुफिया जांच जरूर होनी चाहिए। ताकि उन लोगों के चेहरे भी बेनकाब हो जो देश भर में कुमाऊं विश्वविद्यालय की साख पर बट्टा लगा रहे थे।
नैनीताल पुलिस के फर्जी मार्कशीट प्रकरण में एफआईआर दर्ज करने के बाद जांच का दायरा और बड़ा होगा। ऐसे में विश्वविद्यालय के कई कर्मचारियों की गर्दन फंस सकती हैं। सूत्रों की मानें तो इस गोरखधंधे में कुछ कथित छात्रनेताओं से भी शामिल होने की बात आ रही है। ऐसा माना जा रहा है कि कथित छात्रनेताओं के जरिये ही विद्यार्थियों से पांच से दस हजार रुपये तक वसूल कर उन्हें फर्जी मार्कशीट उपलब्ध कराई जाती थीं। फिलहाल पूरा दारोमदार पुलिस पर है। बावजूद विश्वविद्यालय में भी दबी जुबान पूरे प्रकरण की जांच खुफिया विभाग से कराने की मांग उठने लगी है। ताकि यह भी पता चल सके कि आखिर कितनों सालों से ऐसा चल रहा था।
कुमाऊं विश्वविद्यालय के इतिहास में काले अध्याय के रूप में दर्ज हो चुका फर्जी मार्कशीट प्रकरण में शनिवार को मल्लीताल कोतवाली में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इसमें विश्वविद्यालय के संविदा कर्मी समेत 6 छात्र-छात्राओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। संविदा कर्मी की ओर से बाद में विश्वविद्यालय को सौंपी गई अन्य 17 छात्र-छात्राओं की सूची से इन पर भी तलवार लटकी हुई है। यदि जांच में मार्कशीट फर्जी पाई गई तो आरोपियों की संख्या में डेढ़ दर्जन संख्या का और इजाफा हो सकता है।
कुमाऊं विश्वविद्यालय में परीक्षा आवेदन पत्रों की जांच के दौरान मार्कशीट का फर्जीवाड़ा उजागर हुआ था। मार्कशीट में बाकायदा कुमाऊं विवि के असिस्टेंट रजिस्ट्रार (परीक्षा) के हस्ताक्षर भी थे। इनमें से आधा दर्जन से अधिक विद्यार्थी संस्थागत थे जबकि तीन व्यक्तिगत थे। मामले में विवि की ओर से गठित कमेटी की प्रारंभिक जांच के आधार पर मल्लीताल थाने में तहरीर दी गई थी। इधर विवि जांच के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने लेखा अनुभाग के संविदा कर्मी नंदन देव पुुत्र नैन सिंह की सेवाएं समाप्त कर दी थी। जांच में यह तथ्य सामने आया कि विवि कर्मी की ओर से मुहर तथा मार्कशीट का दुरुपयोग किया गया तथा 500 से 1500 रुपये में फर्जी मार्कशीट बनाई गईं।
दो माह तक एफआईआर दर्ज नहीं होने की खबर अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। जिसे कार्यवाहक कुलपति एवं कमिश्नर आरके सुधांशु ने गंभीरता से लिया तथा एसएसपी को इस फर्जीवाड़े की रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए थे। एसएसपी डा. सदानंद दाते के आदेश के बाद शनिवार को कोतवाली में संविदा कर्मी नंदन देव समेत बीए प्रथम वर्ष की सुुनैना पुत्री धर्मपाल, हीरा सिंह पुत्र दान सिंह, अखिलेश बिष्ट पुत्र चंदन सिंह, बबीता पुत्री खुशाल सिंह तथा बीएससी द्वितीय वर्ष की दीपा रानी पुत्री राम लखन के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 468, 471, 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बता दें कि विवि जांच के दौरान आरोपी संविदा कर्मी ने 6 अप्रैल 2013 समिति को 17 अन्य की सूची भी सौंपी। जिसका सत्यापन किया जाना है। यदि संबंधित सूची जांच में सही पाई गई तो भविष्य में 17 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।
