
राजगढ़ (सिरमौर)। नौहराधार के मार्ग में भराड़ी के समीप एक निजी बस के गहरी खाई में गिरने से घायलों को जिस तेजी से सिविल अस्पताल राजगढ़ उपचार के लिए लाया गया। उसी गति में डाक्टरों के दल ने मुस्तैदी दिखोते हुए उपचार किया। वहीं स्थानीय पुलिस भी डीएसपी भूपेंद्र बरागटा के नेतृत्व में घायलों के अस्पताल में पहुंचने से पहले ही तैनात थी। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी एसडीएम राजगढ़ साढ़े दस बजे के बाद अस्पताल पहुंचे।
लोगों का कहना है कि प्रशासन ने इस दुर्घटना के प्रति कोई गंभीरता नही दिखाई और आलम यह रहा कि जहां उचित मात्रा में एंबुलेंस सेवाएं उपलब्ध न होने से घायलों को लोग निजी वाहनों में जिला अस्पताल सोलन ले गए। वहीं एसडीएम ने पहले उनके क्षेत्र में दुघर्टना न होने का हवाला देकर घायलों और मृतकों को राहत राशि प्रदान करने से इनकार कर दिया। बाद में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष जीआर मुसाफिर ने अस्पताल में आकर घायलों का कुशलक्षेम पूछा ने उन्हें निर्देश दिए कि जिला प्रशासन एक है इसलिए वह राहत राशि प्रदान करें। इसके बाद ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और उसने मृतकों को राहत राशि दी। इस दौरान लगभग सभी घायलों को सोलन रेफर कर दिया गया था और उन्हें जिन्हें सबसे अधिक जरूरत ऐसे समय में राहत की होती है प्रशासन की लेटलतीफी से परेशानी हुई। यद्यपि उसके बाद सांय करीब तीन बजे स्थानीय प्रशासन एसडीएम के नेतृत्व में घायलों को राहत राशि देने के लिए सोलन रवाना हुआ पर इस दौरान सोलन से भी तीन गंभीर रूप से घायल लोगों को शिमला रेफर कर दिया गया है। लोगों का कहना है कि यदि कलगीधर ट्रस्ट बडूसाहिब को प्रशासन सूचना देता तो वह काफी वाहन दे सकते थे। इस बारे में कलगीधर ट्रस्ट बडू साहिब के प्रमुख सदस्य जगजीत सिंह उर्फ काकावीर ने बताया कि यदि उन्हें सूचना दी होती तो सभी मरीजों के लिए ट्रस्ट सोलन, चंडीगढ़ तक वाहन निशुल्क प्रदान कर सकते थे।
