एक साल में पांच दर्जन लोगों की गई जान

नाहन (सिरमौर)। सिरमौर जिले में बस एवं जीप दुर्घटनाएं कोई नया मामला नहीं है। एक साल में 12 सड़क दुर्घटनाओं में 63 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। कहीं ओवरलोडिंग तो कहीं जर्जर सड़कें हादसे का कारण बनी। हर हादसे के बाद जांच की औपचारिकता पूरी हुई और कुछ समय बाद लाचार ग्रामीण उन्हीं वाहनों और जर्जर सड़कों पर फिर से सफर करने को मजबूर हैं। फरवरी 2013 में संगड़ाह के समीप एक आल्टो कार की दुर्घटना में तीन लोगों की मौत हुई थी। जबकि 2012 में एक अन्य जीप दुर्घटना में पच्छाद के चार लोगाें को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इसके बाद हाल ही में 4 जून को बोगधार मेले के दौरान 4 युवाओं की की मौत हो गई थी। जनवरी 2013 में सराहां के समीप एक जीप दुर्घटना में विधायक सुरेश कश्यप को बधाई देने के बाद वापस लौट रहे पांच लोगों की जीप दुर्घटना में मौत हो गई थी।
24 दिसंबर 2012 को शिलाई के समीप ग्रामीण मेला देखने जा रहे 10 लोगों की जीप दुर्घटना में मौत हो गई थी। इससे पूर्व वर्ष 2011 में नैरीपुल-सनौरा मार्ग पर एक निजी बस दुर्घटना में भी पांच लोगों की मौत हुई थी। ददाहू और रेणुका के आसपास पिछले एक वर्ष में पांच अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में 8 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। जिसमें एक ट्रक लाल ढांग के पास जलाल नदी में गिरने से उसमें सवार तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दो लोग घायल हो गए थे। जबकि चार अन्य सड़क दुर्घटनाओं में 5 लोगों ने जान गंवाई।
इसके अलावा 7 जुलाई 2012 को नाहन निर्वाचन क्षेत्र के हरिपुरखोल के समालका खड्ड में बारातियों से भरी टाटा सूमो कार बहने से उसमें सवार 9 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि पांच साल पूर्व सोलन-मीनस मार्ग पर नौहराधार के समीप घंडूरी के पास हुए सड़क हादसे में भी 19 लोगों की जानें गई थी। शक्रवार को सिरमौर जिले में कई वर्षों बाद हुए सबसे भीषण हादसा नौहराधार-पुन्नरधार मार्ग पर भराड़ी के समीप हुआ। जिसमें 20 लोगों की अकाल मौत हो गई।
शुक्रवार को हुई सड़क दुर्घटना में मृतक एवं घायलों की सूची जारी करते हुए पुलिस अधीक्षक सुमेधा द्विवेदी ने कहा कि बस दुर्घटना पर मामला दर्ज कर लिया गया है।

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