लंदन-अमृतसर के बाद शिमला में रैपिड ट्रांसपोर्ट

शिमला। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट और पंजाब के अमृतसर के बाद पर्सनल रैपिड ट्रांजिट प्रणाली अब शिमला में नजर आएगी। इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाला हिमाचल देश का दूसरा राज्य हो गया है। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने अनुमति दे दी है। शुक्रवार को मुख्य सचिव सुदृप्त राय की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस प्रोजेक्ट पर कंसलटेंट नियुक्त करने का फैसला हुआ। कंसलटेंट को दो साल के भीतर इसकी डीपीआर तैयार करनी होगी। इसके बाद इसे फंडिंग के लिए भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय को भेजा जाएगा। इस बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव शहरी विकास पी. मित्रा, अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन अजय मित्तल, प्रधान सचिव वित्त डा. श्रीकांत बाल्दी, निदेशक शहरी विकास विकास लाबरू और नगर निगम शिमला के आयुक्त अमरजीत सिंह आदि कई अफसर मौजूद थे।
लंदन और अमृतसर में ऐसे ही प्रोजेक्ट पर काम कर रही कंपनी अल्ट्रा फेयर वुड के निदेशक (इंजीनियरिंग) विजोन कुमार घोष ने इस प्रणाली पर एक प्रेजेंटेशन भी दी। उन्होंने बताया कि अमृतसर में यह प्रणाली महज 3.3 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर है। वहां यह प्रोजेक्ट 2015 में चालू हो जाएगा। हीथ्रो एयरपोर्ट पर 2011 से यह प्रणाली शुरू की जा चुकी है। इसमें दो मीटर से भी कम ट्रैक पर बिजली से पौड्स दौड़ते हैं। यह ट्रेन के एक छोटे डिब्बे की तरह होते हैं और इनकी रफ्तार काफी तेज होती है। डिब्बों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। शिमला में पुराने बस अड्डे से छोटा शिमला, संजौली, लक्कड़ बाजार होते हुए कुल 16 किलोमीटर लंबा ट्रैक बनाया जाएगा। यह सेवा मुद्रिका बस की तरह होगी।
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यह शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा का ड्रीम प्रोजेक्ट है। कंपनी ने पूरे प्रोजेक्ट पर प्रेजेंटेशन दी है। यह संतोषजनक थी। यदि यह प्रोजेक्ट सिरे चढ़ गया तो शिमला में यातायात सुगम हो जाएगा। यह प्रणाली तेज है और कम जगह घेरती है। हम पीपीपी मोड में इसे चलाने को तैयार हैं।

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