
भरमौर (चंबा)। होटल व्यवसायी पवित्र मणिमहेश यात्रा के बाद से मंदी के दौर से जूझ रहे हैं। गर्मियों में कारोबार चमकने की आस जगी थी, लेकिन वह भी ठंडा पड़ा हुआ है। ठंडा मौसम होने के बावजूद यहां पर्यटकों की आमद न के बराबर है। भरमौर में डेढ़ दर्जन के करीब होटल पंजीकृत हैं। इसमें कई होटल के मालिकों को बिजली तथा अन्य खर्चों का बिल जेब से चुकाना पड़ रहा है। डलहौजी, धर्मशाला, मनाली तथा शिमला में इन दिनों पर्यटकों की भरमार है। भरमौर में कुछ वर्षों से गर्मियों में कम पर्यटक पहुंच रहे हैं। इससे कारोबारियों को काफी घाटा उठाना पड़ रहा है।
पर्यटक डलहौजी, खजियार तथा चंबा से वापस हो जाते हैं। पर्यटकों की घटती संख्या चिंता का विषय है। यहां पर चौरासी परिसर में ऐतिहासिक मंदिर समेत विश्व का इकलौता धर्मराज का मंदिर भी है। इसके अलावा सातवीं शताब्दी के बने लखना देवी माता मंदिर और 10वीं तथा 11वीं शताब्दी के मंदिर विद्यमान हैं। सबसे बड़ा धार्मिक स्थल मणिमहेश कैलाश पर्वत तथा डल झील है। बावजूद यहां पर्यटकों की कमी होटल व्यवसायियों को परेशान किए हुए है। कारोबारी संदीप कुमार, शिव कुमार, राम प्रसाद, अमित कुमार और कुलदीप कुमार ने बताया कि मणिमहेश मेले को छोड़कर अन्य सीजन में काफी मंदा कारोबार रहता है। खासकर नवंबर से मार्च तक होटल का सारा खर्च जेब से भरना पड़ता है।
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पर्यटकों की घटती संख्या का मुख्य कारण सड़क की खस्ताहालत माना जा रहा है। इसके अलावा पार्किंग न होने के कारण भी बाहर से आने वाले पर्यटकों को वाहन खड़े करने में परेशानी होती है।
