
शिमला। केंद्र सरकार के जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन के तहत शहर में चल रही लाल बसें जल्द ही नगर निगम के अधीन आ सकती हैं। नगर निगम सदन द्वारा पारित किया गया प्रस्ताव सरकार के पास पहुंच गया है। अब सरकार को इस बाबत अंतिम फैसला लेना है। उधर, एचआरटीसी को भी बसें वापस करने में कोई आपत्ति नहीं है। ऐसे में संभावित है कि जल्द ही लाल बसों को नगर निगम के अधीन कर दिया जाएगा।
केंद्र सरकार द्वारा 75 लाल बसें शहर को दी गई हैं। अभी यह बसें परिवहन निगम चला रहा है। इन बसों को सिर्फ नगर निगम परिधि के तहत चलाया जाना था लेकिन परिवहन निगम शहर के अलावा करीब 30 किलोमीटर के दायरे में भी इन बसों को चला रहा है। नगर निगम सदन अरसे से इन बसों को लौटाने की मांग करता आया है। निगम सदन का कहना है कि यह बसें सिर्फ शहर में चलनी चाहिए। बसों में विज्ञापन के जरिये आय भी निगम को ही होनी चाहिए लेकिन सरकार के स्तर पर निगम की इस मांग को हर बार अनदेखा किया गया है। अब नगर निगम ने नए सिरे से प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजा है। अधिकारियों ने गहनता से विचार विमर्श कर सरकार के ध्यानार्थ प्रस्ताव भेज दिया है। परिवहन निगम से भी इस संदर्भ में बात की गई है।
वार्डों से आने-जाने में होगी सहूलियत
नगर निगम को अगर 75 लाल बसें मिल जाती हैं तो शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम सुधर जाएगा। हर वार्ड से लोगों को आने-जाने की सहूलियत होगी। आईएसबीटी, टुटीकंडी बाईपास, टुटू, कसुम्पटी, भट्ठाकुफर बाईपास, मशोबरा और भराड़ी तक लोगों को सर्विस मिलेगी। बसों की संख्या बढ़ने से ओवरलोडिंग की समस्या भी हल होगी।
परिवहन निगम को नहीं आपत्ति : सीएस
मुख्य सचिव सुदृप्त राय ने कहा कि प्रस्ताव मिल गया है और इस पर अब सरकार को फैसला लेना है। हालांकि एचआरटीसी को बसें वापस देने में कोई आपत्ति नहीं है। इन्हें शहर में चलाने से निगम को भी घाटा ही हो रहा है।
गंभीरता से विचार करे सरकार : महापौर
महापौर संजय चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार की यह योजना सिर्फ शहरी क्षेत्र के लिए है। ऐसे में इस योजना को चलाने का जिम्मा भी नगर निगम का है। सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। निगम की आय में भी इस योजना से इजाफा होगा।
