वन भूमि हस्तांतरण के मामले लंबित रहे तो कड़ी कार्रवाई

पिथौरागढ़। जिलाधिकारी डा. नीरज खैरवाल ने स्वीकृत विकास कार्यों में वन भूमि के हस्तांतरण के मामले प्रभागीय वनाधिकारी, उप जिलाधिकारी स्वयं उनके (जिलाधिकारी) कार्यालय में लंबित रहने पर कड़ी कार्रवाई अमल में लाने की चेतावनी दी है।
मंगलवार को विकासखंड सभागार में वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए डीएम ने अधिकारियों को भारत सरकार, लखनऊ, देहरादून नोडल और जिला स्तर पर लंबित वन भूमि के प्रकरणों की सूची प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने 20 दिन के भीतर स्वीकृत सड़कों के वन भूमि के प्रकरणों पर की जाने वाली कार्यवाही की समरी प्रस्तुत कर वन भूमि निस्तारण की कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश दिए।
प्रभारी वनाधिकारी एके उपाध्याय ने अवगत कराया कि 35 सड़कों के साथ ही कनालीछीना पॉलीटेक्निक कॉलेज की जमीन, थल से राईआगर तक बिजली की लाइन को भी सैधांतिक स्वीकृति मिली है। डीएम ने अग्रोनबैंड आवलाघाट, पोखरी चंडिकाघाट, कालिका से खुम्ती, ओझागांव, बंदरलीमा, घाट पंचेश्वर जौलजीबी आदि सड़कों के साथ ही अस्कोट के आदि गोल्ड माइंस, छोरीबगड़ प्रोजेक्ट, गर्जिया पेयजल समूह योजना समेत तमाम लंबित प्रकरणों के निस्तारण की कार्रवाई तेज करने के आदेश देते हुए निर्माण एजेंसियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों से आपस में समन्वय स्थापित करने को कहा। डीएम 15 दिन बाद फिर वन भूमि निस्तारण के मामलों की समीक्षा करेंगे।

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