ज्वालामुखी अस्पताल पर सियासत

ज्वालामुखी (कांगड़ा)। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर चरचा में रहने वाले ज्वालामुखी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सियासत शुरू हो गई है। महकमे ने अस्पताल को बगल में करोड़ों की लागत से निर्मित नए भवन के बजाय मंदिर न्यास के मातृछाया यात्री निवास में शिफ्ट करने के आदेश जारी कर दिए हैं। अपनी तरह के इस अटपटे फैसले में अगर सरकारी आदेश लागू होते हैं तो पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगभग तीन करोड़ की लागत से निर्मित भवन खंडहर बन जाएगा। पुख्ता सूत्र बताते हैं कि सीएमओ कांगड़ा को इस बाबत विभाग की ओर से आदेश मिल गए हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को विभाग ने शिफ्ट करने की कवायद भी शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने भवन को स्थानांतरित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। लंबे समय से मौजूदा जगह में बने ज्वालामुखी स्वास्थ्य केंद्र को बस स्टैंड से दूर बने मंदिर न्यास के मातृछाया यात्री निवास में शिफ्ट करने का प्रस्ताव था। इस पर विभाग ने अस्पताल को शिफ्ट करने के लिए बाकी प्रक्रिया को पूरा क रने के लिए सीएमओ धर्मशाला को जारी हुए पत्र में उल्लेख किया है। ज्वालामुखी अस्पताल में भवन की कमी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए यह बदलाव किया गया है। लेकिन सवाल यह है कि जब अस्पताल का अपना नया भवन बनकर तैयार है तो इसे वहां शिफ्ट क्यों नहीं किया जा रहा है? सूत्र बताते हैं कि धूमल सरकार के समय निर्मित इस भवन को लेकर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। विभागीय आदेशों में खंड चिकित्सा अधिकारी कार्यालय एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को शिफ्ट करने के लिए कहा गया है। रोगी कल्याण समिति सचिव डा. सतिंद्र वर्मा ने विभाग की ओर से इस बारे में पत्र मिलने की पुष्टि की है।

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सरकार के आदेश सर्वोपरि : सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. डीएस गुरंग ने विभागीय आदेशों की पुष्टि करते हुए कहा कि सरकार के जो आदेश होंगे, वे सर्वोपरि हैं। उन्होंने कहा कि मातृछाया भवन में 42 कमरे हैं, जिनकी अस्पताल को जरूरत नहीं है। इसके लिए विभाग को लिखा गया है। अंतिम फैसला सरकार ने ही लेना है।

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